विंध्याचल, मीरजापुर। शारदीय नवरात्र के पावन अवसर पर मां विंध्यवासिनी धाम विंध्याचल में भक्ति और अध्यात्म का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। इसी क्रम में नवरात्र के पांचवें दिन नगर पालिका परिषद के अध्यक्ष श्याम सुंदर केशरी ने मां गंगा के तट पर पहुंचकर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और भव्य गंगा आरती में शामिल होकर मां गंगा का आशीर्वाद प्राप्त किया। मां गंगा की आराधना करते हुए
उन्होंने स्वयं को सौभाग्यशाली बताया। इस दौरान उन्होंने श्रद्धालुओं से मां गंगा के निर्मल एवं पवित्र जल को स्वच्छ बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि गंगा केवल एक नदी नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था, संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना का प्रतीक हैं।
नगर पालिका अध्यक्ष श्याम सुंदर केशरी ने कहा कि मां गंगा के पावन तट पर पहुंचकर पूजा-अर्चना और आरती करने से मन को अद्भुत शांति एवं संतुष्टि मिलती है। गंगा तट का आध्यात्मिक वातावरण व्यक्ति को सांसारिक भागदौड़ और तनाव से कुछ समय के लिए दूर कर आत्मचिंतन का अवसर प्रदान करता है।
मां गंगा के प्रति श्रद्धा और विश्वास लोगों को सकारात्मकता, सात्विकता तथा आध्यात्मिक जीवन की ओर प्रेरित करता है। उन्होंने कहा कि मां गंगा के चरणों में बैठकर आराधना करना अपने आप में एक सुखद अनुभूति है, जो मनुष्य को प्रकृति और आध्यात्मिक विरासत से जोड़ती है।
गंगा की निर्मलता बनाए रखने के लिए साबुन-शैंपू का प्रयोग न करें श्रद्धालु
गंगा आरती के दौरान नगर पालिका अध्यक्ष ने श्रद्धालुओं से विशेष अपील करते हुए कहा कि मां गंगा के जल को स्वच्छ और निर्मल बनाए रखना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। श्रद्धालु गंगा में स्नान करते समय साबुन, शैंपू और अन्य रासायनिक पदार्थों का प्रयोग करने से बचें। धार्मिक आस्था के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लेना भी जरूरी है। गंगा के प्रति सच्ची श्रद्धा तभी सार्थक होगी, जब हम उनके जल को प्रदूषित होने से बचाने के लिए स्वयं भी जिम्मेदारी निभाएंगे।
उन्होंने कहा कि घाटों पर स्वच्छता बनाए रखें, पूजन सामग्री निर्धारित स्थानों पर ही डालें और प्लास्टिक सहित अन्य कचरा गंगा में प्रवाहित न करें। प्रत्येक व्यक्ति का छोटा-सा प्रयास भी गंगा की स्वच्छता के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। मां गंगा की पवित्रता बनाए रखने के लिए जनभागीदारी आवश्यक है।
गंगा स्वच्छता को लेकर चल रहे प्रयासों से बदल रही घाटों की तस्वीर
नगर पालिका अध्यक्ष श्याम सुंदर केशरी ने गंगा की स्वच्छता और घाटों के विकास पर चर्चा करते हुए कहा कि गंगा को निर्मल एवं अविरल बनाने के लिए केंद्र और प्रदेश स्तर पर विभिन्न योजनाओं के माध्यम से प्रयास किए जा रहे हैं। सीवेज प्रबंधन, गंदे पानी के शोधन और घाटों के विकास जैसे कार्य गंगा को प्रदूषण से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
उन्होंने वाराणसी का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां सीवेज व्यवस्था और गंगा घाटों के विकास से जुड़े कार्यों के माध्यम से स्वच्छता एवं सुंदरता को बेहतर बनाने के प्रयास किए गए हैं। इसी प्रकार विंध्याचल में भी सीवेज व्यवस्था से संबंधित कार्य शुरू होने की जानकारी देते हुए
उन्होंने उम्मीद जताई कि परियोजना के पूरा होने और आवश्यक व्यवस्थाएं संचालित होने के बाद गंदे पानी के शोधन में मदद मिलेगी। इससे गंगा में प्रदूषण का दबाव कम करने और धार्मिक नगरी की स्वच्छता को बेहतर बनाने में सहयोग मिलेगा।
आधुनिक घाटों से बढ़ रही धार्मिक नगरी की सुंदरता
उन्होंने कहा कि विंध्याचल की पहचान मां विंध्यवासिनी धाम के साथ-साथ मां गंगा के पावन तट से भी जुड़ी हुई है। यहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन-पूजन के लिए पहुंचते हैं और गंगा तट पर स्नान, पूजा तथा आरती कर आध्यात्मिक अनुभूति प्राप्त करते हैं। ऐसे में घाटों की स्वच्छता, सुविधाओं का विकास और व्यवस्थित वातावरण श्रद्धालुओं के लिए महत्वपूर्ण है।
घाटों के निर्माण एवं सौंदर्यीकरण से धार्मिक नगरी की सुंदरता निखरती है और श्रद्धालुओं को बेहतर वातावरण उपलब्ध कराने में मदद मिलती है। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों के साथ-साथ नागरिकों को भी स्वच्छता के प्रति जागरूक होना होगा, तभी गंगा की पवित्रता और घाटों की सुंदरता लंबे समय तक कायम रह सकेगी।
आस्था के साथ स्वच्छता का संकल्प भी जरूरी
नगर पालिका अध्यक्ष ने कहा कि मां गंगा की आरती केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि समाज को एक सकारात्मक संदेश देने का माध्यम भी है। ऐसे आयोजन लोगों को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने के साथ-साथ पर्यावरण और स्वच्छता के प्रति जागरूक करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
उन्होंने श्रद्धालुओं से अपील की कि नवरात्र के इस पावन पर्व पर मां गंगा की आराधना के साथ उनकी स्वच्छता का संकल्प भी लें। मां गंगा की निर्मल धारा आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रहे, इसके लिए प्रत्येक व्यक्ति को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। आस्था, स्वच्छता और जनभागीदारी के समन्वय से ही मां गंगा की पवित्रता को बनाए रखने के प्रयासों को मजबूती मिल सकती है।







