आश्रय की उम्मीद में प्रशासक के दरवाजे पर बैठा बेजुबान

Picture of Shauryanewsindia220@gmail.com

Shauryanewsindia220@gmail.com

FOLLOW US:

Share

चंदौली/सकलडीहा: आश्रय की उम्मीद में प्रशासक के दरवाजे पर बेजुबान गोवंश बैठ गया मानो वह अपने लिए आश्रय की गुहार लगा रहा हो। यह घटना सोमवार की सुबह प्रातः 8:00 बजे देखने को प्राप्त हुई जहां एक घायल व असहाय गोवंश सकलडीहा ग्राम प्रधान वर्तमान में प्रशासक के दरवाजे पर बैठी देखी गई। सरकार द्वारा निराश्रित गोवंशों के संरक्षण और उनके स्वास्थ्य को लेकर किए जा रहे लाखों के दावे ज़मीनी हकीकत से कोसों दूर नज़र आ रहे हैं।

ताज़ा मामला सकलडीहा ग्राम सभा से सामने आया है, जहाँ प्रशासनिक उपेक्षा का एक बेहद संवेदनशील और दर्दनाक मंज़र देखने को मिला। यहाँ एक वृद्ध और बीमार गाय बेसहारा अवस्था में सीधे प्रशासक के दरवाजे पर आकर बैठ गई, मानो वह सीधे प्रशासन से अपने जीने का हक मांग रही हो।

यह स्थिति तब है जब सूबे की सरकार ने इन बेजुबानों को सुरक्षित आश्रय देने के लिए बड़े पैमाने पर गौशालाओं का निर्माण कराया है और उनकी देखरेख व स्वास्थ्य के लिए मुख्य पशुचिकित्सा अधिकारी (CVO) जैसे बड़े अधिकारियों की फौज तैनात कर रखी है। सकलडीहा मुख्य मार्ग और ग्रामीण इलाकों में इन दिनों भारी संख्या में निराश्रित गोवंश सड़कों पर विचरण करते देखे जा सकते हैं।

इनमें से कई गोवंश गंभीर रूप से घायल और बीमार हैं। सड़कों पर घूमते इन मवेशियों के कारण जहाँ एक तरफ आए दिन सड़क हादसे हो रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ ये बेजुबान भूख, प्यास और इलाज के अभाव में तड़पने को मजबूर हैं। स्थानीय ग्रामीणों में इस बात को लेकर गहरा आक्रोश है कि सरकार ने कागज़ों पर तो पूरी व्यवस्था चाक-चौबंद कर रखी है।

सड़कों से आवारा मवेशियों को हटाकर गौशाला भेजने के लिए बजट और स्थान दोनों आवंटित हैं। गोवंशों को सुरक्षित तरीके से गौशाला पहुँचाने के लिए नोडल और संबंधित अधिकारियों की नियुक्तियाँ की गई हैं। घायल और बीमार पशुओं के त्वरित उपचार के लिए CVO और पशु डॉक्टरों की टीम तैनात है। लेकिन सकलडीहा में इन सभी नियमों और नियुक्तियों को ठेंगा दिखाया जा रहा है।

प्रशासनिक चौखट पर बैठी वृद्ध गाय इस बात का जीवंत प्रमाण है कि जिम्मेदार अधिकारी अपने वातानुकूलित कमरों से बाहर निकलकर ज़मीनी हकीकत देखने को तैयार नहीं हैं। सकलडीहा ग्राम सभा के जागरूक नागरिकों का कहना है कि जब तक लापरवाह अधिकारियों पर कड़ी दंडात्मक कार्रवाई नहीं होगी, तब तक कागजी मुस्तैदी ज़मीन पर नहीं उतरेगी।

ग्रामीणों ने ज़िला प्रशासन और उच्चाधिकारियों से मांग की है कि तत्काल प्रभाव से सकलडीहा क्षेत्र के सभी निराश्रित गोवंशों को रेस्क्यू कर गौशाला भेजा जाए और बीमार व घायल पशुओं को CVO की देखरेख में उचित इलाज मुहैया कराया जाए। इस संबंध में जब पशु चिकित्सा अधिकारी से बात की गई तो उन्होंने उपचार हेतु टीम भेजने की बात कहि।अब देखना यह है

कि प्रशासक के ठीक दरवाजे पर बैठी इस बेजुबान की चीख आला अधिकारियों के कानों तक पहुँचती है या कागज़ी दावों की आड़ में इन गोवंशों को यूँ ही तड़पने के लिए सड़कों पर छोड़ दिया जाएगा।

 

रिपोर्ट अलीम हाशमी

Leave a Comment

सबसे ज्यादा पड़ गई