पत्रकारिता केवल पेशा नहीं, लोकतंत्र की धड़कन और समाज की जागती हुई आवाज है। जब इस आवाज को धमकियों, हिंसा और दबाव से रोकने का प्रयास होता है, तब पत्रकारों की सुरक्षा का सवाल पूरे लोकतंत्र की सुरक्षा का सवाल बन जाता है।
इसी संकल्प को मजबूती देने की दिशा में राष्ट्रीय पत्रकार सुरक्षा आयोग पत्रकारों और बुद्धिजीवियों के अधिकार, सम्मान और सुरक्षा के लिए सहयोगात्मक भूमिका निभा रहा है। डॉ. जाकिर हुसैन एजुकेशन ट्रस्ट के उद्देश्यों के अंतर्गत गठित इस आयोग के राष्ट्रीय अध्यक्ष निशिकांत राय के नेतृत्व में संगठन वर्तमान में 16 राज्यों में अपनी सक्रिय उपस्थिति दर्ज करा चुका है।
राष्ट्रीय एवं प्रदेश स्तर पर वरिष्ठ पत्रकारों, विधिक विशेषज्ञों, सेवानिवृत्त IAS-IPS अधिकारियों, सलाहकारों तथा जांच एवं ग्राउंड टीम के सदस्यों का जुड़ना इस अभियान को नई ताकत दे रहा है। आयोग का उद्देश्य स्पष्ट है। किसी पत्रकार को अकेला महसूस न होने देना और उसकी समस्या के समाधान के लिए हर संभव सहयोग उपलब्ध कराना।
आयोग की ओर से बिहार में पत्रकारों एवं बुद्धिजीवियों की समस्याओं के समाधान तथा सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण के निर्माण के लिए सरकार से मार्गदर्शन और सहयोग का आग्रह किया गया है। यह पहल केवल किसी एक संगठन की मांग नहीं, बल्कि निर्भय पत्रकारिता और मजबूत लोकतंत्र की आवश्यकता है।
आज पत्रकारों के लिए संदेश साफ है।
कलम को डरने की जरूरत नहीं, कलम को संगठित होने की जरूरत है।
सत्य की आवाज जितनी मजबूत होगी, लोकतंत्र उतना ही सशक्त होगा।
राष्ट्रीय पत्रकार सुरक्षा आयोग का यह अभियान आने वाले समय में पत्रकारों के लिए सुरक्षा, सम्मान और सहयोग की नई उम्मीद बन सकता है।
आइए, पत्रकार एकजुट हों।
कलम निर्भय हो।
सत्य सर्वोपरि हो।
और पत्रकारिता का सम्मान अक्षुण्ण रहे।







