राष्ट्रीय वृक्ष बरगद के संरक्षण व संवर्द्धन का संदेश देकर शनिवार को वट सावित्री पूजन के अवसर पर महिलाओं ने बरगद का पौधा लगाने तथा दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करने का संकल्प लिया।
नमामि गंगे ने सौभाग्यवती महिलाओं के साथ अखंड सौभाग्य के प्रतीक वट सावित्री के पावन अवसर पर काशी के पौराणिक सिद्धेश्वरी स्थित माता संकटा मंदिर में सैकड़ो वर्षों से विद्यमान वट वृक्ष की आरती उतारी ।

वायुमंडल में सर्वाधिक ऑक्सीजन उत्सर्जित करने वाले राष्ट्रीय वृक्ष बरगद के चारों ओर कलावा (रक्षा-सूत्र) बांधकर महिलाओं ने जीवन की स्थिरता और पति की लंबी आयु की कामना के साथ ही पर्यावरण संरक्षण का भी आवाह्न किया ।
नमामि गंगे काशी क्षेत्र के संयोजक व नगर निगम के स्वच्छता ब्रांड एंबेसडर राजेश शुक्ला ने लोगों को जागरुक करते हुए कहा कि भारत सरकार ने बरगद वृक्ष की पौराणिक, धार्मिक व वैज्ञानिक महत्ता को देखते हुए वर्ष 1950 में इसे राष्ट्रीय वृक्ष घोषित किया था।
धार्मिक मान्यतानुसार बड़ पेड़ के मूल में ब्रह्मा, तना में विष्णु और शीर्ष पर भगवान शिव का वास माना जाता है। गौतम बुद्ध ने वट वृक्ष के नीचे ही तपस्या की थी। आज के दौर में बरगद पेड़ों की पूजा ही नहीं अपितु संरक्षण-संवर्द्धन भी जरूरी है।
आयोजन में नमामि गंगे काशी क्षेत्र के संयोजक व नगर निगम के स्वच्छता ब्रांड एंबेसडर राजेश शुक्ला, सरोज वर्मा, समृद्धि वर्मा, अर्चना मिश्रा, ऋचा चोपड़ा, रीता शर्मा, मनीषा शर्मा अंजू अग्रवाल, संगीता अग्रवाल सहित श्रद्धालु महिलाएं उपस्थित रहे।







