उन्होंने कहा — भदोही के पूर्व विधायक विजय मिश्रा ने अपराध किया होगा, सरकार ने कार्रवाई की। उनका घर बुलडोज़र से गिरा दिया गया, संपत्ति कुर्क कर ली गई, उन्हें जेल भेज दिया गया। कई वर्षों से वे जेल में हैं। मान लेते हैं कि उन्हें उनके अपराधों की सजा मिल रही है।
लेकिन सवाल यहाँ खड़ा होता है…
उनका बेटा, जो अमेरिका में पढ़ाई कर रहा था, पढ़ाई पूरी करके लौटा था, जीवन में कुछ करना चाहता था। उस पर कोई अपराध सिद्ध नहीं था, कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं था। फिर भी उसे जेल भेज दिया गया।
माता प्रसाद पांडेय जी ने सदन में निवेदन किया — “अगर पिता ने अपराध किया तो उसकी सजा पिता को मिले। लेकिन जो बेटा किसी अपराध में शामिल नहीं था, उसका भविष्य क्यों बर्बाद किया जा रहा है? आदरणीय मुख्यमंत्री जी, उसके भविष्य को बख्श दीजिए।”
अब बड़ा प्रश्न यह है —
क्या मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा विजय मिश्रा के बेटे को जेल भेजना उचित था? क्या यह कानून का निष्पक्ष अनुपालन है? या सच में यह ब्राह्मण समाज के प्रति किसी पूर्वाग्रह को दर्शाता है?
यह चर्चा उत्तर प्रदेश विधानसभा के सदन की है।
जनता जानना चाहती है — क्या न्याय में भी जाति देखी जा रही है?









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