वाराणसी। राजघाट पर गुरुवार सुबह गंगा तट पर ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसने स्थानीय लोगों के साथ-साथ वहां मौजूद श्रद्धालुओं को भी प्रेरित किया। नमामि गंगे अभियान से जुड़े युवा स्वयंसेवकों ने सामूहिक श्रमदान करते हुए गंगा तट पर फैली गंदगी को साफ किया। उनकी यह पहल इतना प्रभावी रही कि कुछ ही मिनटों में गंगा का आंचल काफी हद तक स्वच्छ दिखाई देने लगा और तट का स्वरूप बदल गया। स्वयंसेवकों ने मिलकर पांच बड़े गट्ठरों में सैकड़ों किलो गंदगी जैसे कपड़े, पॉलीथिन, प्लास्टिक बोतलें, मूर्ति अवशेष, फूल-मालाएं आदि एकत्र कीं। वहीं दूसरों को भी सफाई के लिए प्रेरित किया।
अभियान का नेतृत्व नमामि गंगे गंगा विचार मंच के जिला संयोजक शिवम अग्रहरि कर रहे थे। उन्होंने कहा कि गंगा केवल एक पवित्र नदी नहीं, बल्कि करोड़ों भारतीयों के जीवन का आधार हैं। उन्होंने बताया कि पौराणिक शास्त्रों में गंगा को पापनाशिनी कहा गया है, जिसमें स्नान मात्र से पापकर्म नष्ट हो जाते हैं। ऐसे में गंगा की सफाई को पुण्य का कार्य मानकर आगे बढ़ना चाहिए। उनका कहना था कि “सबका साथ हो, गंगा साफ हो” केवल एक नारा भर नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने वाला संदेश है, जिसे हर नागरिक को अपनाना होगा।
शिवम अग्रहरि ने कहा कि यदि गंगा किनारे आने वाला प्रत्येक व्यक्ति सिर्फ एक कचरा उठाकर बाहर कर दे, तो गंगा स्वच्छता अभियान में अभूतपूर्व परिणाम देखने को मिल सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि गंगा तलहटी में वर्षों से जमा कचरा हटाने की दिशा में सामूहिक प्रयास आवश्यक है। समाज के हर वर्ग को इस अभियान को महायज्ञ की तरह मानकर शामिल होना चाहिए। इस श्रमदान अभियान में चारुशिला सिन्हा, जय विश्वकर्मा, सुमित मध्येशिया, रुद्र अग्रहरि, अनुराग सोनकर, कुशाग्र कुशवाहा, टीपू, जैनुल समेत अनेक युवा स्वयंसेवक शामिल हुए।

रिपोर्ट विजयलक्ष्मी तिवारी







