जौनपुर
जनपद में जिलाधिकारी वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक एवं विभिन्न विभागों के उच्च अधिकारियों द्वारा जनसमस्याओं के समाधान और लापरवाही पर अंकुश लगाने के लिए समय-समय पर सख्त निर्देश जारी किए जाते हैं। जनसुनवाई में शिकायतें सुनी जाती हैं। अधिकारियों को निष्पक्ष एवं समयबद्ध निस्तारण के आदेश दिए जाते हैं। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है। कि इन आदेशों का धरातल पर कितना पालन हो रहा है। और शिकायतकर्ताओं को वास्तव में न्याय मिल रहा है। या नहीं।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ यशवीर सिंह ने सोमवार को पुलिस कार्यालय में जनसुनवाई के दौरान फरियादियों की समस्याएं सुनकर संबंधित अधिकारियों एवं थाना प्रभारियों को शिकायतों का निष्पक्ष पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण निस्तारण करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
लेकिन जनहित से जुड़ा एक महत्वपूर्ण सवाल यह भी है। कि जब उच्च अधिकारी स्पष्ट निर्देश जारी कर रहे हैं। तो उन मामलों में आगे क्या होता है। जहां शिकायतकर्ता लंबे समय तक कार्रवाई की प्रतीक्षा करते रहते हैं। क्या प्रत्येक शिकायत की निगरानी होती है। क्या लापरवाही बरतने वाले जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की जवाबदेही तय की जाती है।
सोशल मीडिया पर सामने आ रहे मामलों की निष्पक्ष जांच जरूरी
आज सोशल मीडिया के माध्यम से जनपद के कुछ संस्थानों एवं विभागों की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। विभिन्न पोस्ट वीडियो और शिकायतों के जरिए कथित अनियमितताओं को सार्वजनिक किया जा रहा है। ऐसे मामलों में प्रशासन की जिम्मेदारी है। कि तथ्यों का सत्यापन कराया जाए। और यदि आरोप सही पाए जाते हैं। तो संबंधित लोगों के विरुद्ध नियमानुसार विधिक कार्रवाई की जाए।
कुछ मामलों में जांच टीम गठित किए जाने की बात भी सामने आती है। ऐसे में जनता यह जानना चाहती है। कि जांच की स्थिति क्या है। जांच कब तक पूरी होगी। और यदि अनियमितताएं प्रमाणित होती हैं। तो जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध क्या कार्रवाई की जाएगी।
जांच टीम गठित होना अंतिम परिणाम नहीं निष्पक्ष जांच और कार्रवाई जरूरी
किसी भी शिकायत पर जांच टीम गठित करना प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण चरण है। लेकिन शिकायतकर्ता को वास्तविक राहत तभी मिलती है। जब जांच निष्पक्षता से पूरी हो। तथ्यों के आधार पर निष्कर्ष निकले और नियमानुसार उचित कार्रवाई की जाए। यदि जांच में देरी हो रही है। तो उसके कारणों की भी समीक्षा होनी चाहिए।
जिलाधिकारी पुलिस अधीक्षक और अन्य विभागीय अधिकारियों के निर्देशों की प्रभावशीलता तभी दिखाई देगी। जब उनका पालन सुनिश्चित किया जाए। और लापरवाही की शिकायतों पर जवाबदेही तय हो।
प्रशासन से जनहित में सीधे सवाल
जनसुनवाई में प्राप्त शिकायतों के निस्तारण की गुणवत्ता की समीक्षा कौन करता है। सोशल मीडिया पर सार्वजनिक किए जा रहे कथित अनियमितताओं के मामलों का संज्ञान लेकर जांच की स्थिति स्पष्ट क्यों नहीं की जाती है।
जांच टीम गठित होने के बाद जांच की प्रगति और निष्कर्षों की जानकारी शिकायतकर्ता को कब दी जाएगी।
यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं। तो संबंधित जिम्मेदारों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई कब होगी।
क्या शिकायतों के निस्तारण के बाद यह भी सत्यापित किया जाता है। कि पीड़ित को वास्तव में न्याय मिला या केवल कागजों पर निस्तारण दिखा दिया गया है।
जनता को आश्वासन नहीं। पारदर्शी व्यवस्था और जवाबदेही चाहिए
यह सवाल किसी एक अधिकारी या विभाग के विरुद्ध नहीं। बल्कि जनहित से जुड़ी प्रशासनिक जवाबदेही का है। अधिकारियों के निर्देश तभी सार्थक होंगे। जब आम नागरिक को उनका वास्तविक लाभ मिले। शिकायतकर्ता को कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें। और किसी भी स्तर पर लापरवाही सामने आने पर नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित हो।
जनपद के प्रशासन से अपेक्षा है। कि वह जनसुनवाई के निर्देशों के अनुपालन लंबित शिकायतों की स्थिति तथा जांच के बाद की जाने वाली कार्रवाई की प्रभावी समीक्षा करे। जहां शिकायतें प्रमाणित हों। वहां विधिक कार्रवाई हो और जहां आरोप प्रमाणित न हों। वहां तथ्यों के आधार पर स्थिति स्पष्ट की जाए।
क्योंकि लोकतंत्र में जनता की आवाज सुनना ही पर्याप्त नहीं है। उस आवाज से जुड़ी समस्याओं का निष्पक्ष समाधान करना भी प्रशासन की जिम्मेदारी है।
सवाल जनता के होंगे। जवाब शासन-प्रशासन से मांगे जाएंगे।







