वाराणसी
रामनगर स्थित गुरुद्वारा सिंह सभा में सिखों के चौथे गुरु, गुरु रामदास जी का 492वां प्रकाश पर्व बड़ी श्रद्धा और धूमधाम से मनाया गया।

गुरुद्वारे को फूलों और रोशनी से भव्य रूप से सजाया गया । कार्यक्रम की शुरुआत 25 अक्टूबर से श्री अखंड पाठ साहिब के आरंभ से हुई, जो लगातार चलता रहा।
26 अक्टूबर को रैनसबाई कीर्तन का आयोजन हुआ और साथ ही लंगर अनवरत चलता रहा।

27 अक्टूबर को श्री अखंड पाठ साहिब की समाप्ति हुई। सुबह 9 बजे से दोपहर 1 बजे तक कीर्तन दरबार सजाया गया।
कीर्तन दरबार में भाई नरेंद्र सिंह जी (गुरुबाग), भाई रकम सिंह जी (नीचीबाग), भाई बलदेव सिंह जी (रामनगर) और विशेष रूप से पधारे हजूरी रागी जत्था भाई बलजोत सिंह जी “श्री फतेहगढ़ साहिब वाले” ने अपनी मधुर वाणी से गुरबाणी कीर्तन कर संगत को निहाल किया।

गुरु रामदास जी के जीवन पर प्रकाश डालते हुए बताया गया कि उन्होंने ही पवित्र शहर अमृतसर की नींव रखी और मानवता की सेवा का संदेश दिया।
दोपहर 1 बजे से गुरु का अटूट लंगर चला, जिसमें बड़ी संख्या में संगत ने प्रसाद ग्रहण किया। कार्यक्रम में रामनगर और वाराणसी के सैकड़ों श्रद्धालु शामिल हुए।






