जौनपुर,
बदलापुर जीवन में कुछ दुख ऐसे होते हैं। जिन्हें शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। किसी अपने का हमेशा के लिए बिछड़ जाना केवल एक व्यक्ति का जाना नहीं बल्कि परिवार की खुशियों उम्मीदों और भावनाओं का एक हिस्सा खो देना है। ऐसे कठिन समय में जब कोई अपना बनकर परिवार के आंसू पोंछने पहुंचता है। तो उसका साथ दुखी हृदय को संबल देने का काम करता है।
इसी मानवीय संवेदना और सामाजिक सरोकार की भावना के साथ मां धर्मा देवी फाउंडेशन ट्रस्ट के चेयरमैन एवं मानवाधिकार सहयोग संघ (ADCA) उत्तर प्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष सुरेश कुमार शर्मा बदलापुर थाना क्षेत्र के मिरसादपुर गांव पहुंचे। यहां उन्होंने श्रीप्रसाद शर्मा के छोटे भाई स्वर्गीय राज बहादुर शर्मा के 8 अक्टूबर 2026 को हुए दुखद निधन पर शोक संवेदना व्यक्त करते हुए शोकाकुल परिवार को ढांढस बंधाया।
इस दुःखद अवसर पर जनपद वाराणसी के जिलाध्यक्ष अमर शर्मा उर्फ कप्तान भी उपस्थित रहे। दोनों ने दिवंगत आत्मा को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की और परिवार के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त की।
इस अवसर पर सुरेश कुमार शर्मा ने शोकाकुल परिवार के प्रति सहानुभूति प्रकट करते हुए कहा कि किसी अपने को खोने का दर्द वही समझ सकता है। जिसने जीवन में अपनों को बिछड़ते हुए देखा हो। दुःख की घड़ी में परिवार को केवल सांत्वना के शब्दों की ही नहीं। बल्कि अपनेपन सहयोग और संवेदनशील साथ की भी आवश्यकता होती है।
उन्होंने कहा कि समाज की असली पहचान केवल आयोजनों और समारोहों में दिखाई देने से नहीं होती। बल्कि उसकी पहचान तब होती है। जब किसी परिवार पर दुःख का पहाड़ टूटता है। और समाज के लोग उसके साथ खड़े होकर उसका सहारा बनते हैं।
समाज की एकजुटता ही सबसे बड़ी ताकत
सुरेश कुमार शर्मा ने सामाजिक एकता और आपसी भाईचारे का संदेश देते हुए कहा कि हमें ऐसा समाज बनाना चाहिए। जहां किसी परिवार को दुःख की घड़ी में खुद को अकेला महसूस न करना पड़े। समाज के प्रत्येक व्यक्ति का सम्मान जरूरतमंदों की सहायता और पीड़ित परिवारों के साथ खड़े रहना हम सभी का नैतिक दायित्व है।
उन्होंने कहा कि जीवन क्षणभंगुर है। आज हम किसी के दुःख में सहभागी बनेंगे। तभी कल हमारे दुःख में कोई अपना बनकर खड़ा होने की उम्मीद जीवित रहेगी। इसलिए आपसी मनमुटाव भेदभाव और स्वार्थ से ऊपर उठकर मानवता को प्राथमिकता देना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
स्वर्गीय राज बहादुर शर्मा को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उपस्थित लोगों ने दिवंगत आत्मा की शांति तथा शोकाकुल परिवार को इस असहनीय दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की।
यह अवसर एक बार फिर याद दिलाता है। कि इंसान की सबसे बड़ी पहचान उसका पद या प्रतिष्ठा नहीं बल्कि दुःख में किसी के साथ खड़े होने की उसकी भावना है। किसी के आंसू पोंछने के लिए बढ़ाया गया हाथ और दुःख में दिया गया साथ ही मानवता की सच्ची पहचान है।
विनम्र श्रद्धांजलि। भावभीनी श्रद्धांजलि। शत-शत नमन।







