जज को आपराधिक कानून की बुनियादी
समझ नहीं- पुलिस पर FIR का आदेश रद्द,
पूरे उत्तर प्रदेश के जजों को सख्त निर्देश
इलाहाबाद हाईकोर्ट जस्टिस संतोष राय ने 9 अक्टूबर 2026 को महाराजगंज के स्पेशल जज (SC/ST एक्ट) का 11 अगस्त 2026 का वह आदेश रद्द कर दिया, जिसमें घुघली थाने के सब-इंस्पेक्टर राकेश कुमार यादव, कांस्टेबल अमित कुमार और करीब 20 पुलिसकर्मियों पर SC/ST एक्ट समेत गंभीर धाराओं में FIR दर्ज करने को कहा गया था।
हाईकोर्ट ने पाया कि जज ने पुलिस की रिपोर्ट पर विचार नहीं किया और BNSS की धारा 175(3) व 175(4) के अनिवार्य नियमों को नज़रअंदाज़ किया। कोर्ट ने इसे “गंभीर चिंता का विषय” बताया और कहा कि आदेश से जज की आपराधिक कानून व प्रक्रिया की बुनियादी समझ की कमी झलकती है, “बिना कारण वाला” (non-speaking) करार दिया गया।
कोर्ट ने प्रदेश के सभी न्यायिक अधिकारियों के लिए निर्देश जारी किए हैं। अगर किसी लोक सेवक या पुलिसकर्मी पर आरोप उसकी ड्यूटी के दौरान के काम से जुड़ा है, तो FIR का आदेश देने से पहले धारा 175(4) की प्रक्रिया अपनानी होगी। इसमें उसके उच्च अधिकारी की रिपोर्ट और उस कर्मचारी का पक्ष देखना शामिल है। साथ ही आदेश में साफ लिखना होगा कि आरोपित काम ड्यूटी से जुड़ा था या नहीं।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि इसका मकसद सरकारी कर्मचारियों को छूट देना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि FIR के आदेश सोच-समझकर दिए जाएँ। फैसले की प्रति सभी जजों, DM, SSP/SP और पुलिस कमिश्नरों को भेजी गई है।







