यह रिपोर्ट इलाहाबाद हाई कोर्ट के 17 मार्च, 2025 के उस आदेश से उपजे स्वतः संज्ञान वाले मामले में तैयार की गई थी, जिसमें कहा गया था कि किसी लड़की के पजामे का नाड़ा खींचना और उसके स्तनों को पकड़ना रेप की कोशिश नहीं माना जाएगा।
वकील ने कोर्ट को क्या बताया?
वरिष्ठ वकील शोभा गुप्ता ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि ऐसा समय-समय पर होता रहा है और इसमें 9 जुलाई को पटना हाई कोर्ट का एक आदेश भी शामिल है, जिसमें कहा गया था कि किसी महिला की सलवार उतारना और उसकी छाती दबाना रेप की कोशिश नहीं है।
जस्टिस वी. मोहना ने पूछा कि क्या पटना हाईकोर्ट में इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का जिक्र किया गया था, जिसमें जजों को इस मुद्दे पर संवेदनशील बनाने का निर्देश दिया गया था। भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने पटना हाई कोर्ट के आदेश का जिक्र करते हुए कहा कि जजों की भी यह जिम्मेदारी है कि वे कुछ रिसर्च करें। उन्होंने कहा, “स्टाफ कुछ नहीं कर रहा है।”
सुप्रीम कोर्ट ने कहा, “यह निर्देश दिया जाता है कि सभी अदालतें हैंडबुक में दी गई बातों का पालन करें। राज्य सभी पुलिस स्टेशनों को निर्देश जारी करें कि वे एफआईआर दर्ज करते समय और चार्जशीट दाखिल करते समय हैंडबुक का पालन करें। हम तर्कपूर्ण फैसला भी अपलोड करेंगे।”
पटना हाई कोर्ट ने हाल ही में कहा कि किसी महिला की सलवार उतारना और उसकी छाती दबाना रेप की कोशिश साबित करने के लिए काफी नहीं है। जस्टिस पूर्णेंदु सिंह ने कहा कि अगर कोई व्यक्ति महिला की सलवार उतारता है और उसकी छाती दबाता है तो ये हरकतें महिला की मर्यादा भंग करने का अपराध मानी जाएंगी न कि रेप की कोशिश। पटना हाई कोर्ट ने रेप की कोशिश के मामले में एक व्यक्ति की सजा को रद करते हुए यह टिप्पणी की।










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