चंन्दौली बबुरी
प्राधिकृत नियंत्रक के नियुक्त होने के बाद भी विद्यालय का भविष्य अधर में।
सन् 1953 से स्थापित पुरे मण्डल में शिक्षा के हर क्षेत्र में प्रथम स्थान रखने वाला यह विद्यालय अपने , हीन दीन दशा में आंसू बहा रहा है। शासन ने भ्रष्टाचार और अराजकता में लिप्त प्रबंधक को दो-दो बार निलंबित करने के बाद जिला विद्यालय निरीक्षक चन्दौली को पुनः प्राधिकृत नियंत्रक के रूप में इस विद्यालय की व्यवस्था को संभालने के लिए इन्हें नियुक्त किया। लगभग चार-पांच महीना बीत चुके हैं लेकिन विद्यालय की भ्रष्टाचार, अराजकता एवं अवैध फीस वसूली पर किसी भी प्रकार की रोक नहीं लग पाई है।
यहां की व्यवस्था और शिक्षा का स्तर दिन प्रतिदिन गिरता जा रहा है । अब विद्यालय में पढ़ाई नहीं बल्कि विद्यालय कैंपस पशुओं का चारागाह बन चुका है, अब तो विद्यालय की व्यवस्था भाग्य भरोसे है। विद्यालय कैंपस में प्रधानाचार्य की आवासीय व्यवस्था होने के बाद भी प्रधानाचार्य विद्यालय को छोड़कर के जब होता है तब घर या बाहर निकल जाते हैं। विद्यालय की व्यवस्था शिक्षा और विकास व इसके रख रखाव से इनसे कोई मतलब नहीं है
, जबकि शिक्षण कार्य के समय यह खुद चार-पांच अध्यापकों को अपने पास में बैठाकर दिनभर मटरगश्ती करते रहते हैं जिससे शिक्षा का स्तर गिरता जा रहा है ,यही नहीं बल्कि बच्चों के द्वारा प्राप्त फीस को प्रधानाचार्य और निलंबित प्रबंधक दोनों मिलकर के आज भी बंदर बांट कर रहे हैं , विगत पिछले कई वर्षों से विद्यालय के विकास का कार्य नहीं किया जा रहा है, बल्कि विकास तथा अन्य मदों से प्राप्त पैसा प्रबंधक और प्रिंसिपल मिलकर के अपने व्यक्तिगत कार्य में खर्च कर रहे हैं
जिसका ना तो कोई लेखा-जोखा है ना तो कोई हिसाब किताब है जबकि प्राधिकृत नियंत्रक के देखरेख में यह विद्यालय चलने के बावजूद अराजकता व लूट – खसोट का माहौल आज भी बना हुआ है, इस प्रकार प्राधिकृत नियंत्रक के गैर जिम्मेदाराना प्रतिक्रिया व व्यवहार से इनके मूकदर्शक बने होने के कारण क्षेत्र के लोग उनके व्यक्तित्व पर सवालिया निशान खड़ा कर रहे हैं, इनके शिथिलता व निष्क्रियता के द्वारा विद्यालय व बच्चों का भविष्य अधर में लटका दिखाई दे रहा है।
अगर जिला प्रशासन इस पर कोई उचित कार्यवाही नहीं करता है तो क्षेत्र के नागरिक न्याय के लिए सड़कों पर उतरने का भी काम कर सकते हैं।
रिपोर्ट – अलीम हाशमी







