सैयदराजा(चंदौली) आदर्श नगर पंचायत के रामलीला प्रांगण में रामलीला समिति शिवानगर के तत्वावधान में चल रहे रामलीला में शनिवार की निशा कुंभकरण वध के बाद रावण अपने सबसे शक्तिशाली पुत्र मेघनाथ को युद्ध के लिए भेजा । मेघनाथ बदला लेने के लिए तत्पर होकर युद्ध को जाता है । वह पूरे रामा दल को नाग फाॅश में बाॅध देता है । जामवंत से उसका युद्ध होता है । नारद यह देखते हैं कि सर्वथा स्वतंत्र व बंधन मुक्त रहने वाले प्रभु अपनी नर लीला करने के कारण नाग फाॅश में बॅधे पड़े हैं । नारद गरुड़ जी से बंधन मुक्त करने को कहते हैं । गरुड़ जी वहाॅं पहुंच कर नाग फाॅश से मुक्ति दिलाते हैं । राम की आज्ञा पाकर लक्ष्मण मेघनाथ से युद्ध कर उसका वध कर देते हैं । मेघनाथ की पत्नी सुलोचना को दासी बताती है कि उसके आँगन में आभूषण युक्त पुरुष की भुजा कटी पड़ी है । सुलोचना उस भुजा को पहचान लेती है कि यह उसके पति की भुजा है, लेकिन उसको विश्वास नहीं होता है, वह भुजा से कहती है कि यदि यह मेरे पति की भुजा हो तो सारा हाल लिख कर दुविधा मिटा दे ।
भुजा सारा हाल लिख देती है । विलाप करती है व लंका पति रावण के पास पहुॅच कर सारा वृत्तान्त बताती है । रावण स्वयं घोर युद्ध कर पुत्र का बदला लेने का आश्वासन देता है । तत्पश्चात वह मन्दोदरी के पास जाती है । मंदोदरी कहती है कि जो घटना लंका में घट रही है उसकी भविष्यवाणी नारद मुनि मुझ से पहले ही कर गये हैं ।

सुलोचना रामा दल में पहुंच कर प्रभु श्री राम को प्रणाम करती है । सुग्रीव मेघनाद का मस्तक सुलोचना को सौंपते हैं । सुग्रीव सन्देह प्रकट करते हैं कि कटी हुई भुजा ने कुछ लिखा होगा । राम कहते हैं कि आपका यह कुतर्क अनुचित है पतिव्रता स्त्री बड़ी सामर्थवान होती है । यह कटा हुआ मस्तक कभी जंग लङेगा । सुलोचना मस्तक से हॅसने को कहती है । मेघनाथ का मस्तक खिल खिला कर हॅसता है । सुग्रीव का भ्रम समाप्त हो जाता है ।
सुलोचना प्रभु राम से निवेदन करती है कि वह अपने पति के साथ सती होने जा रही है । हे कृपालु आज के दिन आप युद्ध बन्द रखने की कृपा करें । श्री राम एवमस्तु कहतें हैं और सुख पूर्वक अपने पति के साथ प्रभु के धाम जाने का आशीर्वाद देते हैं । जब सुलोचना ने अपने पति का सर गोद में रखकर सती होकर प्राण त्याग देती है। इस दृश्य को देखकर दर्शकों की आंखें नम हो गई । इसके बाद रावण वध का मंचन कलाकारों द्वारा किया जाता है मन्दोदरी लंका पति रावण को रोकने का प्रयास करती है और सीता को प्रभु श्री राम को सौंपने की सलाह देती है ।
हालांकि रावण मन्दोदरी की बात को अनसुना कर श्री राम से युद्ध करने के लिए युद्ध भूमि पर चला जाता है । श्री राम और रावण के बीच भयंकर युद्ध होता है । श्री राम रावण को मारने के कई प्रयास करते हैं लेकिन वे विफल रहते हैं तभी विभीषण श्री राम को रावण की नाभि पर तीर चलाने को कहते हैं । श्री राम रावण की नाभि पर तीर चलाते हैं, जिससे नाभी में तीर लगते ही रावण धराशायी होकर जमीन पर गिर जाता है । इस तरह रावण का वध हो जाता है ।
इस अवसर पर नगर पंचायत सैयदराजा चेयरमैन प्रतिनिधि राजेश कुमार जायसवाल ऊर्फ बाढू ने अपने सम्बोधन में कहा कि रामलीला केवल एक मंचन नहीं बल्कि यह जीवन की सच्चाई है। इसमें मनुष्य का हर पहलू जुड़ा हुआ है। अगर मनुष्य रामायण से प्रेरणा लेकर जीवन यापन करें तो उसकी हर मुश्किल आसान होगी । हमें रामायण के आदर्शों को अपने जीवन में उतारना चाहिए।
इस अवसर पर रविंद्र जायसवाल, पन्ना लाल केशरी, कामाख्या केशरी, सत्येंद्र कुमार सिंह, अश्विनी मौर्य, सैयदराजा किड्स पब्लिक स्कूल के प्रबंधक सुशील कुमार शर्मा, वीरेंद्र सिंह,जवाहर पाण्डेय, सभासद संतोष जायसवाल, जिलाध्यक्ष उद्योग व्यापार मण्डल चंदौली राकेश शर्मा,शशांक पांण्डेय,अंकित जायसवाल, वरिष्ठ समाजसेवी मीना सिंह, पूर्व चेयरमैन मदन प्रसाद कुशवाहा, विरेन्द्र जायसवाल, प्रमोद विश्वकर्मा, अनिल कुमार अग्रहरि, जगदीश मास्टर, गुलाब मौर्य, सूरज, रणविजय सिंह, परमेश्वर मोदनवाल,संजय कश्यप, पंकज दूबे, अरविंद तिवारी सहित काफी संख्या में दर्शक उपस्थित रहे।
रिपोर्ट – अलीम हाशमी
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