RPSS के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने पत्रकारहित में लिखा नेता प्रतिपक्ष राहुल गाँधी को पत्र

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लोकतांत्रिक भारत में देश की सरकारों द्वारा निरन्तर हो रही प्रेस की अनदेखी और लगातार बढ़ते जोखिमों को लेकर राष्ट्रीय पत्रकार सहायता संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने नेता प्रतिपक्ष राहुल गाँधी के नाम एक पत्र लिखा, ऑनलाइन भेजे गये पत्र के अनुसार संगठन के चीफ ने लिखा कि देश में आजादी के 79 गुजर चुके हैं,

लेकिन इन वर्षों में पत्रकारिता की गरिमा निरंतर गिरती ही जा रही हैं, अच्छे और आर्थिक तंगी से जूझते लघु एवं मझौले समाचार पत्र और पत्रकारों को गलत और धनाढ्य संस्थानों एवं पत्रकारों ने विकसित नहीं होने दिया, देश की पूर्व और वर्तमान सरकारों ने भी सच्ची सकारात्मक पत्रकारिता को उचित सहयोग नहीं दिया,

यही कारण हैं कि भारत में चंद के चक्कर में सम्पूर्ण पत्रकार को दुश्मन की नजर से देखा जा रहा, जबकि ऐसे अनगिनत पत्रकार हैं जिन्होंने सच के समर्थन और गलत के विरोध वाली निष्पक्षीय पत्रकारिता की और समर्पणभाव वाली सोच की पत्रकारिता के लिये अपना पूरा जीवन गुजार दिया तथा आज भी जनहितैषी पत्रकारिता के दायत्व का भली भांति निर्वहन कर रहे हैं,

लेकिन इसी निष्पक्षीय और ईमानदारी की पत्रकारिता ने उन्हें और उनके परिवारों के सामने आर्थिक संकट खड़ा कर दिया और वो इस संकट से जूझ रहे हैं, अधिकांश लघु व मझोले अखबारों एवं उनके पत्रकारों को न अच्छा भोजन मिल पा रहा हैं, न अच्छा मकान, न बच्चों को अच्छी शिक्षा, और न अच्छी स्वास्थ सेवा, न परिवहन सुबिधा, इसके अलाबा अन्य तमाम सुबिधा भी नहीं मिल रहीं हैं, क्योंकि ऐसी तमाम जीवन उपयोगी जरूरतों की पूर्ति के लिये पत्रकार की अपनी आय का कोई जरिया नहीं हैं ।

इसके बाद भी वो तमाम जोखिमों का सामना हर रोज करता हैं । सुरक्षा के अभाव में तमाम तरह का अत्याचार उत्पीड़न यातनाएं पत्रकार और उनके परिवारों को दी जाती हैं, यही नहीं प्रेस को लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ बोलकर सम्पूर्ण पत्रकार वर्ग को भ्रमित किया जाता हैं । जो अति निंदनीय और गम्भीर विषय हैं ।

उन्होंने नेता प्रतिपक्ष एवं रायबरेली से काँग्रेस सांसद राहुल गाँधी को पत्र लिखकर संसद में सभी विषयों पर प्रस्ताव रखने और उन्हें पास कराने की माँग की हैं । ताकि लोकतांत्रिक भारत में पत्रकारों को सुरक्षित और सुविधाजनक पत्रकारिता करने का अवसर और प्रेस को लोकतंत्र के चौथे स्तम्भ का संवैधानिक दर्जा मिल सके ।

 

रिपोर्ट – जगदीश शुक्ला

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