जौनपुर
बदलापुर कोतवाली क्षेत्र के मछलीगांव में सांप के डंसने की दर्दनाक घटना में 21 वर्षीय बीए छात्रा आंचल की मौत हो गई। बताया जा रहा है। कि आंचल अपनी बहन के साथ घर में सो रही थी। इसी दौरान बेड पर चढ़े सांप ने उसे डंस लिया। घटना के बाद परिवार में कोहराम मच गया और गांव में भी मातम पसरा है।
सांप के डंसने के बाद परिजन तत्काल छात्रा को उपचार के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे। हालत गंभीर होने पर चिकित्सकों ने उसे जिला अस्पताल रेफर किया, जहां चिकित्सकों ने छात्रा को मृत घोषित कर दिया। इसके बाद परिजन उसे एक निजी अस्पताल भी लेकर पहुंचे, जहां चिकित्सक ने भी उसकी मौत की पुष्टि की।
घटना के बाद परिवार की ओर से सांप को पकड़ने के लिए सर्प पकड़ने वालों को बुलाया गया। काफी खोजबीन के बाद भी सांप का पता नहीं चल सका।
एक दर्दनाक घटना, और स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण संदेश
आंचल की मौत ने परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है। लेकिन यह घटना ग्रामीण क्षेत्रों में सर्पदंश जैसी आपात स्थिति में तत्काल और प्रभावी उपचार की उपलब्धता के महत्व को भी सामने लाती है।
गौरतलब है। कि कुछ दिन पूर्व जिलाधिकारी सैमुअल पाल एन. द्वारा स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्थाओं को लेकर जानकारी दी गई थी कि जनपद के प्रत्येक सीएचसी पर सर्पदंश के उपचार में प्रयुक्त एंटी-स्नेक वेनम (सांप काटने की दवा/इंजेक्शन) उपलब्ध कराया गया है। ऐसे में इस घटना के बाद स्वाभाविक रूप से यह महत्वपूर्ण हो जाता है। कि संबंधित स्वास्थ्य केंद्रों पर सर्पदंश के मामलों में दवा की उपलब्धता, प्रशिक्षित चिकित्सा स्टाफ, समय पर उपचार तथा आवश्यकता पड़ने पर रेफरल व्यवस्था लगातार प्रभावी बनी रहे।
सर्पदंश के मामले में कुछ ही समय बेहद महत्वपूर्ण होता है। इसलिए ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को भी जागरूक किए जाने की जरूरत है। कि सांप के काटने की स्थिति में झाड़-फूंक या घरेलू उपचार में समय गंवाने के बजाय तत्काल नजदीकी सरकारी स्वास्थ्य केंद्र पहुंचें।
जनहित में जरूरी है। कि सर्पदंश उपचार की व्यवस्था हर सीएचसी पर सक्रिय और 24 घंटे प्रभावी रहे।
आंचल की असमय मौत पूरे परिवार के लिए अपूरणीय क्षति है। साथ ही यह घटना स्वास्थ्य विभाग के लिए भी एक संवेदनशील अवसर है। कि जिले में सर्पदंश के उपचार से जुड़ी व्यवस्थाओं की जमीनी स्तर पर समीक्षा की जाए, ताकि किसी अन्य परिवार को ऐसी त्रासदी का सामना न करना पड़े।
प्रशासन की पहल तभी सार्थक होगी, जब आपातकाल के समय जरूरतमंद मरीज तक उपचार बिना देरी के पहुंच सके।







