चन्दौली इलिया
क्षेत्र के गांधी नगर, बरहुआं, शाहपुर, सुल्तानपुर, रसिया समेत दर्जनों गांवों में चल रहे ईंट भट्टों ने ग्रामीणों की जिंदगी पर कहर बरपा रखा है। भट्टों की ऊंची-ऊंची चिमनियों से निकलता काला धुआं अब सीधे लोगों के फेफड़ों में जहर घोल रहा है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी अब भी आंख मूंदे बैठे हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि दिन-रात उगलता धुआं पूरे इलाके को गैस चैंबर में बदल रहा है। हालात ऐसे हैं कि लोगों को खुली हवा में सांस लेना भी मुश्किल हो गया है। आंखों में जलन, सांस फूलना, खांसी और दमा जैसी बीमारियां तेजी से फैल रही हैं। सबसे ज्यादा मार बुजुर्गों, बच्चों और खेतों में काम करने वाले किसानों पर पड़ रही है।

इतना ही नहीं, भट्टों से उड़ने वाली राबिश और राख ने घरों की छतों और कपड़ों को काला कर दिया है। खेतों में खड़ी फसलें भी इससे अछूती नहीं हैं आम और सब्जियों की पैदावार पर बुरा असर पड़ रहा है, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि कई ईंट भट्टे खुलेआम प्रदूषण मानकों की धज्जियां उड़ा रहे हैं। न तो कोई जांच हो रही है और न ही कोई कार्रवाई। सवाल यह है कि आखिर किसके संरक्षण में यह धुएं का कारोबार फल-फूल रहा है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों की मानें तो इस जहरीले धुएं के लंबे संपर्क से ब्लड प्रेशर, शुगर, अस्थमा और फेफड़ों की गंभीर बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। आने वाले समय में यह समस्या और विकराल रूप ले सकती है।
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से मांग की है कि भट्टों की तत्काल जांच कराई जाए और जिग-जैग तकनीक जैसी पर्यावरण अनुकूल प्रणाली को अनिवार्य किया जाए।
अब बड़ा सवाल क्या प्रशासन जागेगा या चकिया के गांव यूं ही जहर की चादर में घुटते रहेंगे।
रिपोर्ट – अलीम हाशमी







