आजमगढ़।
शिकायतों के निस्तारण में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर जिलाधिकारी रविन्द्र कुमार ने कड़ा रुख अपनाते हुए सख्त कार्रवाई के संकेत दे दिए हैं। आईजीआरएस पोर्टल पर शत-प्रतिशत असंतुष्ट फीडबैक मिलने पर खंड विकास अधिकारी तरवां से स्पष्टीकरण तलब करते हुए उनका वेतन रोकने का निर्देश जारी किया गया है। वहीं अधिक असंतुष्ट फीडबैक प्राप्त होने पर जिला गन्ना अधिकारी को भी कड़ी फटकार लगाई गई।
कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित समीक्षा बैठक में जिलाधिकारी ने उत्तर प्रदेश जनसुनवाई पोर्टल (आईजीआरएस) पर प्राप्त शिकायतों के निस्तारण की विभागवार समीक्षा की। उन्होंने स्पष्ट कहा कि कोई भी प्रकरण डिफाल्टर श्रेणी में नहीं जाना चाहिए और हर शिकायत का निर्धारित समयसीमा में गुणवत्तापूर्ण समाधान अनिवार्य रूप से सुनिश्चित किया जाए।
समय से कार्यालय पहुंचें अधिकारी, होगी जांच
डीएम ने निर्देश दिया कि सभी अधिकारी निर्धारित समय से कार्यालय में उपस्थित होकर जनसुनवाई करें। अनुपस्थित पाए जाने पर संबंधित अधिकारी के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
अधिक शिकायत वाले गांवों में खुद पहुंचें अधिकारी
जिलाधिकारी ने कहा कि जिन ग्रामों में सर्वाधिक शिकायतें या असंतुष्ट फीडबैक मिल रहे हैं, वहां संबंधित अधिकारी स्वयं मौके पर जाकर शिकायतकर्ता से संवाद करें और दोबारा असंतुष्ट फीडबैक की स्थिति न बनने दें।
अवैध कब्जों पर सख्ती के निर्देश
भूमि संबंधी और बार-बार आने वाली शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए अपर जिलाधिकारी (वि./रा.) को निर्देश दिया गया कि अधिक शिकायत वाले ग्रामों में उपजिलाधिकारी अथवा तहसीलदार को मौके पर भेजकर अवैध कब्जे हटवाएं और दोषियों पर विधिक कार्रवाई सुनिश्चित करें।
‘सी’ श्रेणी पर जताई नाराजगी
समीक्षा के दौरान मंडलायुक्त द्वारा ‘सी’ श्रेणी दिए जाने और आईजीआरएस पर शत-प्रतिशत असंतुष्ट फीडबैक मिलने पर डीएम ने कड़ी नाराजगी व्यक्त की।
बैठक में अपर जिलाधिकारी (वि./रा.) गंभीर सिंह, मुख्य राजस्व अधिकारी संजीव ओझा, मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. एनआर वर्मा, जिला विकास अधिकारी संजय कुमार सिंह, डीसी मनरेगा राम उदरेज यादव सहित सभी जनपद स्तरीय अधिकारी मौजूद रहे। स्पष्ट संदेश: अब शिकायतों में लापरवाही नहीं चलेगी, गुणवत्ता पूर्ण निस्तारण ही प्राथमिकता होगी।







