प्रयागराज:
माध्यमिक शिक्षा परिषद, उत्तर प्रदेश (UP Board) ने वर्ष 2026 की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षाओं को लेकर परीक्षार्थियों के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर दी है। बोर्ड के सचिव द्वारा जारी आधिकारिक पत्र के अनुसार, परीक्षा के दौरान अनुचित साधनों (नकल) का प्रयोग करते हुए पकड़े जाने वाले छात्र-छात्राओं पर आपराधिक मुकदमा (FIR) दर्ज नहीं किया जाएगा।
छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखकर लिया गया फैसला…
बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि ‘उत्तर प्रदेश सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों का निवारण) अधिनियम-2024’ के तहत जो कठोर दंडात्मक प्रावधान और आपराधिक मुकदमे की व्यवस्था है, वह परीक्षार्थियों (विद्यार्थियों) पर लागू नहीं होगी। यह निर्णय छात्रों के शैक्षणिक भविष्य को ध्यान में रखते हुए लिया गया है ताकि छोटी उम्र में उन पर कोई कानूनी दाग न लगे।
क्या होगी कार्रवाई.?
हालांकि, आपराधिक मुकदमे से छूट का मतलब यह नहीं है कि नकल करने पर कोई सजा नहीं मिलेगी। पत्र के अनुसार:
कॉपी का मूल्यांकन नहीं: यदि कोई छात्र नकल करते हुए या अनुचित साधनों में लिप्त पाया जाता है, तो उस विषय की उसकी उत्तर पुस्तिका (Answer Sheet) का मूल्यांकन नहीं किया जाएगा।
परिणाम घोषित नहीं होगा…
संबंधित छात्र का परीक्षा परिणाम परीक्षा प्राधिकारी द्वारा निर्धारित नियमों के तहत ही घोषित या निरस्त किया जाएगा।
शैक्षणिक कार्रवाई…
छात्र को उस विशेष परीक्षा या भविष्य की परीक्षाओं से वंचित (Debar) किया जा सकता है।
नकल माफियाओं पर गिरेगी गाज
बोर्ड ने यह भी साफ कर दिया है कि रियायत सिर्फ छात्रों के लिए है। परीक्षा की शुचिता भंग करने वाले बाहरी तत्वों, नकल माफियाओं और अधिनियम की धारा-8 में वर्णित व्यक्तियों (जैसे सॉल्वर गैंग या पेपर लीक में शामिल लोग) के खिलाफ अत्यंत कठोर और निर्णायक कार्रवाई की जाएगी।
सचिव का संदेश…
शासन परीक्षाओं को शुचितापूर्ण और नकलविहीन कराने के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन छात्रों के भविष्य को देखते हुए उन पर आपराधिक दायित्व नहीं थोपा जाएगा।











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