नईदिल्ली:
भारतीय हस्तनिर्मित कालीन उद्योग का प्रतिनिधित्व करने वाली कालीन निर्यात संवर्धन परिषद (सीईपीसी) ने भारत–अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) के संपन्न होने का स्वागत किया है। परिषद ने इसे वैश्विक बाजारों में लंबे समय से चुनौतियों का सामना कर रहे कालीन उद्योग के लिए समयोचित और निर्णायक हस्तक्षेप बताया है।
भारतीय हस्तनिर्मित कालीन उद्योग उच्च शुल्क व्यवस्थाओं से सबसे अधिक प्रभावित उद्योग में शामिल रहा इंडिया का लगभग 60 परसेंट हैंडमेड कारपेट एक्सपोर्ट US निर्यात किया जाता है, जिससे कालीन उद्योग के लिए सबसे बड़ा मार्केट माना गया है। यूरोपीय संघ के साथ-साथ अमेरिका भारतीय हस्तनिर्मित कालीनों के लिए सबसे महत्वपूर्ण गंतव्यों में से एक बना हुआ है।
परिषद ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल तथा वस्त्र मंत्री गिरिराज सिंह के मार्गदर्शन में भारत सरकार द्वारा किए गए केंद्रित और सतत प्रयासों के लिए हार्दिक आभार व्यक्त किया। परिषद ने कहा कि सरकार की सक्रिय व्यापार कूटनीति से भारतीय हस्तनिर्मित कालीनों के लिए अंतर्राष्ट्रीय बाजार पहुंच में उल्लेखनीय विस्तार और सुधार हुआ है।

इस विकास का स्वागत करते हुए परिषद के अध्यक्ष कैप्टन मुकेश गोम्बर ने कहा कि जहां भारत–यूरोपीय संघ और भारत–ब्रिटेन FTA से उद्योग को आंशिक राहत मिली थी, वहीं भारत–अमेरिका BTA ने अभूतपूर्व खुशी दी है, विशेषकर शुल्क को पहले के 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत किए पर उन्होंने कहा कि इस सुधार से भारतीय हस्तनिर्मित कालीनों की अपने सबसे महत्वपूर्ण निर्यात बाजार में प्रतिस्पर्धात्मकता बहाल हुई है और निर्यातकों तथा खरीदारों का विश्वास फिर से मजबूत हुआ है।
परिषद के उपाध्यक्ष असलम महबूब ने कहा कि उद्योग वित्तीय वर्ष का समापन सकारात्मक स्थिति में कर रहा है और नए वित्तीय वर्ष में प्रवेश करते समय प्रमुख नीतिगत बिंदु मजबूती से पूरे हो चुके हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि ये व्यापार समझौते भारत के 2 अरब अमेरिकी डॉलर के हस्तनिर्मित कालीन उद्योग पर मजबूत सकारात्मक प्रभाव डालने की उम्मीद रखते हैं, जिससे देशभर में इस शिल्प से जुड़े लगभग 25 लाख बुनकरों को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा।
डॉ. स्मिता नागरकोटी, कार्यकारी निदेशक (प्रभारी), परिषद ने जानकारी दी कि परिषद निर्यातकों और अन्य हितधारकों को भारत–यूके और भारत–ईयू मुक्त व्यापार समझौतों से जुड़ी संभावनाओं, अनुपालन आवश्यकताओं तथा प्रक्रियात्मक पहलुओं से परिचित कराने के लिए संरचित आउटरीच और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करेगी, ताकि इन समझौतों के लाभ प्रभावी रूप से जमीनी स्तर तक पहुँच सकें।
परिषद ने निर्यात वृद्धि, कारीगरों की आय में वृद्धि तथा हस्तनिर्मित कालीन क्षेत्र में भारत के दीर्घकालिक वैश्विक नेतृत्व को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से भारत सरकार के साथ मिलकर व्यापार समझौतों का अधिकतम लाभ उठाने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया







