बीएचयू के 50 विधि विद्यार्थियों ने जेल की दुनिया को करीब से जाना, मानवाधिकार और बंदियों के अधिकारों की ली जानकारी

Picture of Shauryanewsindia220@gmail.com

Shauryanewsindia220@gmail.com

FOLLOW US:

Share

वाराणसी। कानून की पढ़ाई अब सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं, बल्कि जेल की जमीनी हकीकत तक पहुंच रही है। काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के विधि संकाय के 50 छात्र-छात्राओं ने सोमवार को वाराणसी जिला कारागार का शैक्षणिक भ्रमण कर बंदियों के अधिकारों, जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली और मानवाधिकारों से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं को करीब से समझा।

विधि संकाय के लीगल एड क्लीनिक की ओर से आयोजित इस एक दिवसीय अध्ययन दौरे का उद्देश्य विद्यार्थियों को आपराधिक न्याय व्यवस्था के व्यावहारिक पक्षों से परिचित कराना और कानून के साथ मानवीय दृष्टिकोण का महत्व समझाना रहा।

किताबों से आगे, कानून की जमीनी समझ

भ्रमण से पहले विधि संकाय परिसर में प्रेरक सत्र आयोजित किया गया। विधि संकाय प्रमुख प्रो. प्रदीप कुमार सिंह ने कहा कि कानून की वास्तविक शिक्षा केवल किताबों और अदालतों तक सीमित नहीं है। बेहतर अधिवक्ता बनने के लिए सुधारात्मक संस्थाओं में मानवाधिकारों की जमीनी स्थिति को समझना भी जरूरी है।

वहीं, प्रो. एम.के. पाढ़ी ने कहा कि आपराधिक न्याय प्रणाली में कारागार का उद्देश्य प्रतिशोध नहीं, बल्कि बंदियों में सुधार और उनका पुनर्वास करना है। उन्होंने विद्यार्थियों को जेल मैनुअल और कैदियों के विधिक अधिकारों के अनुपालन का गंभीरता से अध्ययन करने की सलाह दी।

जेल की व्यवस्थाओं का किया निरीक्षण

जिला कारागार पहुंचने पर कारागार उप-अधीक्षक ने विश्वविद्यालय के प्रतिनिधिमंडल का स्वागत किया। जेल अधिकारियों ने परिचर्चा के दौरान बंदियों को मिलने वाली भोजन, स्वास्थ्य और अन्य बुनियादी सुविधाओं की जानकारी दी। साथ ही बंदियों के विधिक एवं मौलिक अधिकारों और मानवाधिकार मानकों के बारे में विस्तार से बताया।

विद्यार्थियों ने बंदियों के अधिकार, त्वरित न्याय और जेल मैनुअल के प्रावधानों से जुड़े सवाल पूछे। अधिकारियों ने उनके सवालों के जवाब देकर कानूनी और प्रशासनिक व्यवस्थाओं की जानकारी दी।

बैरक से अस्पताल और आधुनिक रसोई तक

शैक्षणिक भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों ने पुरुष बंदियों की बैरकों का निरीक्षण कर उनके रहन-सहन और जेल प्रशासन की व्यवस्थाओं को देखा। इसके बाद आधुनिक जेल रसोई का जायजा लिया, जहां भोजन तैयार करने की प्रक्रिया, स्वच्छता के मानकों और निर्धारित आहार सूची की जानकारी दी गई।

विद्यार्थियों को जेल परिसर में संचालित अस्पताल भी ले जाया गया। यहां उन्हें बंदियों के लिए उपलब्ध चिकित्सा सुविधाओं, आकस्मिक उपचार और स्वास्थ्य सेवाओं की व्यवस्था से अवगत कराया गया।

भ्रमण के अंतिम चरण में महिला बंदी वार्ड का निरीक्षण किया गया। विद्यार्थियों ने महिला बंदियों के लिए उपलब्ध विशेष सुविधाओं और उनके कल्याण के लिए संचालित योजनाओं की जानकारी ली।

इस अध्ययन दौरे ने विद्यार्थियों को कानून के व्यावहारिक स्वरूप, बंदियों के अधिकारों और न्याय व्यवस्था में सुधार एवं पुनर्वास की भूमिका को समझने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान किया।

 

रिपोर्ट विजयलक्ष्मी तिवारी

Leave a Comment