वाराणसी। भारत रत्न उस्ताद बिस्मिल्लाह खां की शहनाई की गूंज से जुड़ा पैतृक मकान एक बार फिर विवादों के घेरे में है। बेनियाबाग स्थित भीखाशाह की गली में उनके मकान को तोड़ने के लिए बिल्डर के पहुंचते ही परिजनों ने विरोध शुरू कर दिया। करीब 10 वर्षों से चल रहे पारिवारिक विवाद ने अब नया मोड़ ले लिया है। इस घटनाक्रम ने उस्ताद की ऐतिहासिक विरासत को संरक्षित करने के दावों पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जिस कमरे को संग्रहालय बनाने की थी योजना, उसी पर मंडराया तोड़फोड़ का खतरा
हैरानी की बात यह है कि करीब पांच महीने पहले नगर निगम ने इसी मकान के उस कमरे को संग्रहालय के रूप में विकसित करने की योजना घोषित की थी, जहां उस्ताद बिस्मिल्लाह खां रियाज किया करते थे।
5 जून 2026 को नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने बताया था कि उस्ताद के रियाज वाले कमरे को म्यूजियम बनाया जाएगा। साथ ही मकान और आसपास के क्षेत्र में सड़क, फुटपाथ तथा प्रकाश व्यवस्था सुधारने की भी योजना थी।
लेकिन अब उसी ऐतिहासिक मकान को लेकर तोड़फोड़ का विवाद खड़ा हो गया है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि नगर निगम की संग्रहालय योजना का क्या होगा और क्या उस्ताद की अनमोल विरासत को बचाया जा सकेगा?
2020 में भी हुई थी तोड़फोड़ की कोशिश
इस मकान का विवाद नया नहीं है। अगस्त 2020 में भी यहां तोड़फोड़ की कोशिश हुई थी। उस समय परिवार के कुछ सदस्यों ने आरोप लगाया था कि मकान को व्यावसायिक परिसर में बदलने की तैयारी की जा रही है।
विरोध के बाद वाराणसी विकास प्राधिकरण (वीडीए) की टीम मौके पर पहुंची और काम रुकवा दिया था। वीडीए ने स्पष्ट किया था कि जर्जर भवन को गिराने के लिए नगर निगम की अनुमति और नए निर्माण के लिए स्वीकृत नक्शा आवश्यक होगा।
शहनाई की साधना का ऐतिहासिक ठिकाना
उस्ताद बिस्मिल्लाह खां ने अपने जीवन के कई महत्वपूर्ण वर्ष इसी मकान में बिताए थे। इसी घर में उनकी शहनाई की साधना और रियाज की गूंज सुनाई देती थी। उनके निधन के बाद से ही इस ऐतिहासिक स्थान को उनकी स्मृतियों के रूप में संरक्षित करने की मांग उठती रही है।
अब एक बार फिर मकान पर संकट के बीच बड़ा सवाल यही है कि क्या प्रशासन समय रहते उस्ताद की विरासत को बचाने के लिए ठोस कदम उठाएगा, या संग्रहालय बनाने का सपना सिर्फ घोषणा बनकर रह जाएगा?







