मीरजापुर। 2013 बैच की IAS और मीरजापुर की पूर्व जिलाधिकारी दिव्या मित्तल ने आखिरकार अपनी राजनीतिक पारी का औपचारिक ऐलान कर दिया है। उन्होंने अपनी नई पार्टी का नाम ‘जननीति भारत’ रखा है। आज मां विंध्यवासिनी की नगरी से जारी एक वीडियो संदेश में उन्होंने पार्टी के गठन की घोषणा की।
विशेष बात यह रही कि उन्होंने अपनी नई राजनीतिक यात्रा की शुरुआत मां विंध्यवासिनी की पावन नगरी मीरजापुर से की है। जानकारी के अनुसार उन्होंने मां विंध्यवासिनी धाम की पावन धरा पर विधि-विधान के साथ नव दिवसीय कलश की स्थापना भी की है, जिसके बाद उन्होंने अपने संकल्प का वीडियो जारी किया।
वीडियो में दिव्या मित्तल ने कहा – “जब मैंने पिछली बार राजनीति में आने की बात कही थी तो आपको एक नंबर दिया था, उस पर आपने इतने मैसेज भेजे कि व्हाट्सएप ने वो नंबर ही रोक दिया। मैं उम्मीद का दिया लेकर निकली थी, आपके संदेश आए तो लगा सूरज के सामने दिया लिए खड़ी हूं। मुझे तो सिर्फ खिड़की खोलनी थी।”
उन्होंने कहा कि देश में पार्टियों की कमी नहीं है, *सुनवाई की कमी है, सुनवाई कुछ की होती है सबकी नहीं*।उन्होंने कहा कि आज मैं गंगा किनारे हूं और गंगा में हर बूंद बराबर होती है, कोई छोटी-बड़ी नहीं और रास्ता वो बूंदें खुद मिलकर तय करती हैं। मुझे ऐसी ही पार्टी बनानी है जिसमें हर व्यक्ति एक बूंद हो और हर बूंद गंगा। इसी सोच से जननीति भारत निकली है।
उन्होंने नारा दिया – *”राजनीति आप पर राज करती है, जननीति में राज आपका होगा”*।
पूर्व जिलाधिकारी दिव्या मित्तल ने ऐलान किया कि जननीति भारत 2027 का उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव लड़ेगी और वह स्वयं मीरजापुर सदर सीट से चुनाव मैदान में उतरेंगी।
वीडियो में उन्होंने अपनी पार्टी के तीन वचन गिनाए –
पहला वचन – जन से नीति, नीति से भारत: देश की नीतियों के केंद्र में लोग होंगे और उन नीतियों को तय भी लोग ही करेंगे। जनता बताएगी कि उसे क्या चाहिए और कैसे मिलेगा यह विशेषज्ञ बताएंगे। उन्होंने मीरजापुर की देवकली देवी का उदाहरण दिया जिन्होंने पानी न होने पर भी स्कूल मांगा था,
स्कूल की नींव पड़ी पर जमीन जंगल की बताकर का रोक दिया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि बड़े उद्योगपति को कारखाना लगाना होता है तो जंगल 80 दिन में रास्ता दे देता है, गरीब के लिए स्कूल-रास्ता बनना हो तो फाइल 80 साल घूमती है। नीति वही जहां न्याय हो, न्याय वहां जहां सुनवाई सबकी हो।
दूसरा वचन – हर फैसला जरूरत देखकर होगा, पहचान देखकर नहीं: उन्होंने कहा इस देश में दो तरह के लोग हैं – कोई और कोई नहीं। सड़क का उदाहरण देकर कहा कि किसी एक ‘कोई’ के इशारे पर सड़क मोड़ दी जाती है और सैकड़ों ‘कोई नहीं’ के घर उजड़ जाते हैं।
जननीति में नक्शे पर सभी की उंगलियां होंगी। उन्होंने महिला सुरक्षा पर कहा कि अंधेरे मोड़ की पहचान वहां से गुजरने वाली बेटियों को है, वे अपने मोबाइल ऐप पर उस जगह को मार्क करेंगी, जहां 100 निशान इकट्ठे होंगे वहीं लाइट, गश्त और कैमरा लगेगा। फैसला पुलिस या नेता का नहीं, उन लड़कियों का होगा। यही व्यवस्था हैंडपंप, सड़क, खड़ंजा सब में होगी।
तीसरा वचन – पारदर्शिता और निगरानी जनता के हाथ में: सरकारी योजनाओं की स्थिति सीधे मोबाइल पर दिखेगी ताकि बिचौलियों से छुटकारा मिले। गांव में सड़क, नाली, हैंडपंप जैसे कामों की प्रगति, समयसीमा और जिम्मेदार अधिकारी का विवरण डिजिटल नक्शे पर सार्वजनिक होगा।
गौरतलब है कि दिव्या मित्तल ने 13 साल की प्रशासनिक सेवा के बाद इस्तीफा दिया था। वे IIT दिल्ली और IIM बेंगलुरु से पढ़ी हैं और मीरजापुर, देवरिया, संत कबीर नगर समेत कई जिलों में DM रह चुकी हैं।









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