शीतला माता एवं सती माता मंदिर बड़ी बाजार, वाराणसी के विवादित मामले को लेकर की गई प्रेस वार्ता

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शीतला माता एवं सती माता मंदिर, बड़ी बाजार, वाराणसी की भूमि के संबंध में राजस्व अभिलेखों के अनुसार गाटा संख्या 478, रकबा 1 बिस्वा 5 धूर की भूमि के पुराने अभिलेखों में मालिकाना क्रमशः महाराजा महाराज विभूति नारायण सिंह, तत्पश्चात महाराजा साहब बहादुर कारस्तकार तथा शिवनंदन नवयत आबादी दर्ज है, जो वर्ष 1983 तक दर्ज बताया जाता है।

वर्तमान में अभिलेखों में शरनलाल पुत्र राम शरनलाल का नाम दर्ज है। ये सभी अभिलेख राजस्व रिकॉर्ड में उपलब्ध हैं। यह भूमि प्राचीनकाल से धार्मिक स्थल के रूप में पूजा, पाठ, भंडारा, नवरात्रि एवं सामाजिक कार्यक्रमों का केंद्र रही है। मंदिर परिसर की सफाई, जीर्णोद्धार एवं निर्माण कार्य इसी पर किया जा रहा था।

मंदिर परिसर एवं विवादित हिस्से का विवरण

मंदिर परिसर से संबंधित भाग संख्या 20/1 पर मंदिर निर्माण/जीर्णोद्धार का कार्य चल रहा था, जबकि भाग संख्या 20/2 से संबंधित विवाद न्यायालय में विचाराधीन है। दोनों हिस्सों तथा गाटा संख्या के सही नक्शे, सीमांकन एवं राजस्व अभिलेख उपलब्ध हैं, जिससे स्पष्ट है कि मंदिर निर्माण का कार्य विवादित हिस्से पर नहीं, बल्कि भाग संख्या 20/1 पर ही किया जा रहा था।
धारा 164/165 के संदर्भ में पारित आदेश पर आपत्ति

इसके बावजूद, सदर एसडीएम द्वारा धारा 164/165 के संदर्भ में जो आदेश पारित कर मंदिर का निर्माण कार्य रोक दिया गया है, वह आदेश तथ्यों, अभिलेखों एवं विधिक प्रक्रिया के विरुद्ध है। यह आदेश न्यायालय में लंबित प्रकरण की प्रकृति और वास्तविक स्थिति की समुचित जाँच के बिना तथा स्थल निरीक्षण की पूर्ण निष्पक्षता बनाए बिना पारित किया गया प्रतीत होता है।

लेखपाल की भूमिका पर गंभीर प्रश्न उठते हैं। आरोप है कि संबंधित लेखपाल ने दबाव, प्रभाव और पक्षपातपूर्ण ढंग से रिपोर्ट तैयार की, जिससे प्रशासन को गलत जानकारी दी गई। लेखपाल द्वारा की गई रिपोर्ट, सीमांकन, नक्शा एवं आख्या की निष्पक्ष जाँच कराकर उसके विरुद्ध आवश्यक विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई की माँग की जाती है।

. इम्तियाज अहमद की भूमिका की जाँच की माँग

इम्तियाज अहमद, नाम का व्यक्ति इस प्रकरण में अनुचित एवं अनधिकृत रूप से हस्तक्षेप कर रहा है। आरोप है कि वह धनबल, प्रभाव एवं व्यक्तिगत स्वार्थ के लिए प्रशासनिक अधिकारियों पर दबाव बनाने का प्रयास कर रहा है, जिससे क्षेत्र में तनाव एवं सामाजिक सौहार्द प्रभावित हो रहा है। इस पूरे प्रकरण में उसकी भूमिका की गहन व निष्पक्ष जाँच कर, यदि दोष सिद्ध होता है तो उसके विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।

कमिश्नरेट व्यवस्था लागू होने के उपरांत, कानून-व्यवस्था बनाए रखना पुलिस प्रशासन की जिम्मेदारी है। ऐसे में मंदिर निर्माण/धार्मिक स्थल से संबंधित विवादित स्थिति में, प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा विशेषाधिकार का दुरुपयोग करते हुए निर्माण कार्य रोकना उचित नहीं है। इस आदेश की पुनर्विचार /रद्दीकरण तथा वास्तविक तथ्यों की जाँच कर उचित निर्णय लिए जाने की माँग है।

प्रकरण में अब तक सहयोग एवं मार्गदर्शन प्रदान करने वाले सभी जन प्रतिनिधियों, काशी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी के आदरणीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी , उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री जी, संबंधित मंत्रिगण, स्थानीय जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारीगण, सामाजिक संगठनों, धर्माचार्यों तथा क्षेत्रीय नागरिकों का हृदय से आभार एवं धन्यवाद।

आप सभी के सहयोग से हमें विश्वास है कि माता शीतला एवं सती माता मंदिर का निर्माण कार्य शीघ्र ही पुनः प्रारंभ होगा और काशी की धार्मिक आस्था, परंपरा व सामाजिक सौहार्द की रक्षा होगी।

रिपोर्ट विवेक कुमार यादव 

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