गोकुल में बड़े ही धूम-धाम से मनाया गया भगवान श्रीकृष्ण का जन्म।

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चहनिया (चंदौली)

क्षेत्र के कल्याणपुर गांव में चल रहे श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन वृंदावन से पधारे कथा वाचन आचार्य अमित कृष्ण शास्त्री ने कथा में भगवान श्री कृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन करते हुए कहा कि जब-जब धरा पर अत्याचार, दुराचार, पापाचार बढ़ा है तब-तब प्रभु का अवतार हुआ है,प्रभु का अवतार अत्याचार को समाप्त करने और धर्म की स्थापना के लिए होता है।

जब जब मथुरा के राजा कंस के अत्याचार अत्यधिक बढ़ गए तब धरती के करुण पुकार पर श्री हरि विष्णु ने देवकी माता के अष्टम पुत्र के रूप में भगवान श्री कृष्ण ने कंस के कारागार में जन्म लेकर वासुदेव जी को बताया कि हमें ले जाकर के गोकुल में नंद बाबा और यशोदा के यहां छोड़कर के वहां से कन्या को लेकर के आप कारागार में आ जाओ वासुदेव जी ने ऐसा ही किया जैसे कन्या कंस के कारागार में पहुंची जोर-जोर से रोने लगी रोते हुए कन्या की आवाज को सुनकर कंस के पहरेदार जाग जाते हैं जाकर के कंस को

बताते हैं की जेल खाने में वासुदेव जी का आठमा पुत्र ने जन्म ले लिया है कंस दौड़ाता हुआ आ करके देखता है की पुत्र की जगह पुत्री हो गई है। पुत्री का ही पैर पड़कर के दीवाल में मारना चाहता है तभी हाथ से छूट कर जगदंबा बोल पड़ती हैं अरे कंस तू मेरे को क्या मारेगा तेरे को मारने वाला गोकुल में जन्म ले लिया है जगदंबा वहां से भविष्य वाणी करते हुए मां जगदम्बा विंध्याचल में निवास करती हैं।

इधर गोकुल में नंद बाबा को बहुत बधाइयां मिलता हैं और बड़े हर्षित होते के साथ ही बड़े प्रसन्न होते हैं सब ग्वाल बाल गोपी मिलकर धूमधाम से भगवान कृष्ण का गोकुल में जन्मोत्सव मानते हैं इधर कंस भगवान का बध करने के लिए पुतना तृणावर्त अघासुर बकासुर आदि बड़े-बड़े राक्षसों को भेजता है।

भगवान सबको मारते हैं भगवान गोपियों के घर में जाकर के माखन चुराते हैं मक्खन के साथ गोपियों को मन को भी चुरा लेते हैं।आगे चलकर भगवान कालिया नाग के ऊपर तांडव नृत्य कर कालिया नाग को वृंदावन से भगा देते हैं वहीं भगवान गोवर्धन पूजा बृजवासियों के साथ करते हैं इंद्र कुपित होता है बृजवासियों पर इंद्र के मां का मर्दन करते हैं

भगवान रास रचाते हैं रस में सभी गोपियों के मनोरथ को भगवान पूर्ण करते हैं भगवान वृंदावन को छोड़कर के मथुरा पुरी को जाते हैं मथुरा में जाकर कंस का वध करके अवंतिका पुरी उज्जैन में पढ़ने के लिए भगवान जाते हैं अल्पकाल में विद्या ग्रहण कर मथुरा पुरी में आते हैं उद्धव जी को पत्र ले करके वृंदावन भेजते हैं इधर भगवान ने भीष्मक नंदिनी रुक्मणी से विवाह करते हैं तभी सभी ग्रामवासीय व क्षेत्रवासी भगवान की सुंदर विवाह की झांकियां को देखकर बहुत प्रसन्न होते हैं।

इस अवसर पर प्रेमनाथ पाठक, केदारनाथ पाठक, शर्वेश पाठक, अंबुज पाठक, पंकज पाठक, धनंजय पांडेय, पंकज पांडेय, राहुल मिश्रा, अनिल कुमार, ग्रिशेन तिवारी, रुचि पांडेय,तिवारी,अरुण सिंह, अभिषेक चौबे,आदि लोग मौजूद रहे।

आयोजक प्रेमनाथ पाठक ने आये हुए सभी श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरण कर आभार व्यक्त किया।

 

रिपोर्ट – आलिम हाशमी

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