हमारी एकता एवं एकात्मता विश्व बन्धुता के संरक्षण—संवर्धन का आधार — सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबले

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काशी। हमारी एकता एवं एकात्मता विश्व बन्धुता के संरक्षण और संवर्धन का आधार है। न्यायोचित मार्ग पर चलते हुए बन्धुता को आधार बनाकर स्वतंत्रता और समानता की रक्षा करने के लिए भारत ने सामाजिक समरसता को अंगीकार किया है। उक्त विचार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ काशी मध्य के तिलक नगर में रक्षाबन्धन उत्सव को सम्बोधित करते हुए मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मा0 सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबले ने व्यक्त किया। सिगरा स्थित डॉ0 सम्पूर्णानन्द स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में उपस्थित स्वयंसेवकों एवं मातृशक्तियों को सम्बोधित करते ​हुए सरकार्यवाह जी ने कहा कि योग वशिष्ठ के एक श्लोक के अनुसार ऐसे लोग जो हमारे बन्धु नहीं हैं, उनसे प्रतिदिन मिलने से निकटता बढ़ती है और वह हमारे बन्धु बन जाते हैे। जबकि निकटता के अभ्यास को छोड़ने से बन्धुता का स्नेह बन्धन छूट जाता है। संघ में भी अपरिचित को परिचित एवं परिचित को मित्र बनाने की परम्परा रही है। स्वतंत्रता, समानता एवं बन्धुता इन तीनों अवधारणाओं को विश्व के अनेक देशों ने अलग—अलग रूपों में स्वीकार किया। ऐसे राष्ट्र जहां केवल स्वतंत्रता को महत्व दिया गया वहां स्वच्छंदता व्याप्त हो गयी। जबकि सोवियत रूस जैसे देश ने समानता को ​वरीयता दी यह विचार भी टिक नहीं पाया। भारतीय संस्कृति में बन्धुता को स्वतंत्रता और समानता के साथ जोड़ा गया है। इन तीनों तत्वों का मूलाधार सामाजिक समरसता है।
सरकार्यवाह जी ने आगे कहा कि हिन्दू संस्कृति में सम्पूर्ण विश्व को एक कुटुम्ब स्वीकार किया गया है। मै और समस्त जीव एक ही परमात्मा के अंश है, उदार चरित के साथ इस भावना को स्वीकार करना चाहिए। सम्बन्धों के मध्य अविश्वास, रक्षाबन्धन के स्नेहसूत्र को कमजोर करते हैं। आपस में बंटने पर विरोधी पक्ष को उसका लाभ मिलता है। जब हम सभी विश्व बंधुत्व की चर्चा करते है तो उसका मूलाधार भविष्य पुराण का श्लोक ”येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबलः। तेन त्वामभिबध्नामि रक्षे मा चल मा चल॥” जिसका अर्थ है कि जिस प्रकार राजा बलि को स्नेह बन्धन में बांधा गया उसी प्रकार मैं भी आपको स्नेह बन्धन में बांधता हूं। यह बन्धन स्थिर रहे। वर्तमान में परिवार और समाज में जो अस्थिरता उत्पन्न हो गयी है, उसका कारण स्वार्थ है। मनुष्य के अन्दर स्वार्थ विकार के रूप में नहीं आना चाहिए।
कार्यक्रम के प्रारम्भ में काशी मध्य के मा0संघचालक डॉ0हेमन्त गुप्त जी, तिलक नगर के मा0नगर संघचालक प्रदीप जी एवं सरकार्यवाह जी द्वारा भगवा ध्वज को रक्षासूत्र बांधा गया। कार्यक्रम का संचालन नगर कार्यवाह सत्यपाल ने किया। उत्सव में प्रमुख रूप से क्षेत्र कार्यवाह डॉ0वीरेन्द्र जायसवाल, क्षेत्र प्रचारक अनिल जी, क्षेत्र सेवा प्रमुख युद्धवीर जी, प्रान्त कार्यवाह मुरली पाल जी, सह प्रान्त कार्यवाह डॉ0 राकेश जी, प्रान्त प्रचारक रमेश जी, उ0प्र0 के आयुष राज्यमंत्री दयाशंकर मिश्र दयालू, काशी के महापौर अशोक तिवारी, प्रो0मंजू द्विवेदी, गुंजन नन्दा, निवेदिता मेहरोत्रा, अंजू अग्रवाल समेत बड़ी संख्या में स्वयंसेवक एवं मातृशक्ति उपस्थित रहीं।

नेपाल के प्राकृतिक आपदा पीड़ितों के प्रति सरकार्यवाह जी ने श्रद्धांजलि निवेदित किया
दो दिन पूर्व नेपाल के बाढ़ आपदा में मृतक जनमानस के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबले जी ने पूरे संघ परिवार की ओर से श्रद्धांजलि निवेदित की। उन्होंने कहा कि जो बन्धु इस आपदा में संकटग्रस्त हुए है, संघ परिवार उनके प्रति भी अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त करता है।

riport roshni

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