जौनपुर
मुख्यमंत्री के निर्देशों के बावजूद जौनपुर शहर की सड़कों पर छुट्टा पशुओं की समस्या खत्म होने का नाम नहीं ले रही है।
शहर के प्रमुख चौराहों और भीड़भाड़ वाले इलाकों में आए दिन बड़ी संख्या में पशुओं का जमावड़ा राहगीरों के लिए मुसीबत बनता जा रहा है।
हालात ऐसे हैं। कि सड़क पर वाहन कम और छुट्टा पशु अधिक नजर आते हैं। पशुओं के झुंड के कारण यातायात प्रभावित होने के साथ जाम की स्थिति भी बन रही है।
सबसे बड़ा सवाल यह है। कि यदि शहर से बाहर अस्थाई गौशालाओं का संचालन हो रहा है। तो फिर सड़कों पर घूम रहे इन पशुओं को वहां पहुंचाने की जिम्मेदारी आखिर किसकी है।
नगर पालिका की पशु पकड़ने वाली गाड़ियां दिखाई तो देती हैं। लेकिन क्या कार्रवाई वास्तव में हो रही है। या महज खानापूर्ति। यह सवाल अब शहरवासियों के बीच चर्चा का विषय बन गया है।
प्रशासन के सामने बड़ा सवाल
छुट्टा पशुओं के कारण किसी दिन कोई बड़ा हादसा हो गया तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा। क्या प्रशासन किसी गंभीर दुर्घटना का इंतजार कर रहा है।
शहरवासियों का कहना है। कि कुछ दिनों तक अभियान चलता है। फिर वही ढाक के तीन पात। ऐसे में ‘चार दिन की चांदनी, फिर अंधेरी रात’ वाली कहावत जौनपुर में चरितार्थ होती दिखाई दे रही है।
अब देखना यह है। कि नगर पालिका प्रशासन और जिला प्रशासन इस गंभीर समस्या पर स्थायी समाधान की दिशा में क्या कदम उठाता है। या फिर सड़कों पर घूमते छुट्टा पशु इसी तरह व्यवस्था को आईना दिखाते रहेंगे।









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