भारत ने सफलतापूर्वक अपना पहला स्वदेशी टैक्टिकल एयरोस्टेट (Tactical Aerostat) यानी हाई-एल्टीट्यूड बैलून सिस्टम विकसित कर लिया है, जो 20 किलोमीटर की ऊंचाई तक उड़कर कैमरों और सेंसरों के जरिए निगरानी करने में पूरी तरह सक्षम है। इस महत्वपूर्ण तकनीकी उपलब्धि से जुड़ी मुख्य बातें नीचे दी गई हैं:
विकास और तकनीक साझा प्रयास:
इस आधुनिक सिस्टम को भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) दिल्ली, रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) और एक भारतीय रक्षा स्टार्टअप ने मिलकर तैयार किया है।
कार्यप्रणाली:
यह हवा से हल्की गैस से भरा एक विशाल गुब्बारा (एयरोस्टेट) प्लेटफॉर्म है। ड्रोन के विपरीत इसे हवा में रहने के लिए लगातार ईंधन या बिजली की जरूरत नहीं होती, जिससे यह लंबे समय तक टिका रह सकता है।
प्रमुख क्षमताएं और उपयोगहाई-टेक पेलोड:
इस बैलून पर निगरानी कैमरे (Surveillance Cameras), इन्फ्रारेड (IR) सेंसर और थर्मल डिटेक्टर लगाए जा सकते हैं, जो दुश्मनों पर पैनी नजर रखते हैं।
व्यापक कवरेज:
20 किमी की अत्यधिक ऊंचाई पर जाने के कारण यह एक बहुत बड़े सीमावर्ती या शहरी क्षेत्र की लगातार और सटीक निगरानी कर सकता है।
संचार नेटवर्क:
इसका उपयोग आपातकालीन स्थिति या प्राकृतिक आपदाओं के दौरान अस्थायी कम्युनिकेशन नेटवर्क (संचार सेवा) स्थापित करने के लिए भी किया जा सकता है।
भारत के लिए इसका महत्व:
अब तक भारत रक्षा क्षेत्र में इस तरह की तकनीकों के लिए मुख्य रूप से अमेरिका जैसे विदेशी देशों पर निर्भर था। इस स्वदेशी सिस्टम के आने से रक्षा आयात पर निर्भरता कम होगी और ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान को मजबूती मिलेगी।









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