शंकरगढ़,प्रयागराज।
जनपद के यमुनानगर शंकरगढ़ थाने की देहरी पर अब अपराध कांपता है। वजह सिर्फ एक नाम: थाना प्रभारी सुशील कुमार दुबे। इन्होंने कानून की किताब को बंद करके इंसाफ की किताब खोल दी है। इनकी दिनचर्या अब नियम नहीं, रणनीति है। रणनीति दबंगों को नेस्तनाबूद करने की और टूटे हुए भरोसे को जोड़ने की।
या तो सुधर जाओ, या शंकरगढ़ छोड़ दो! यह चेतावनी अब यहां के हर दबंग के कानों में गूंज रही है। शंकरगढ़ थाना प्रभारी ने अपनी कुर्सी को न्याय की चौकी बना दिया है। उनकी आक्रामक दिनचर्या ने थाने का पूरा मिजाज बदल डाला है, अब यहां वर्दी का रौब नहीं इंसाफ की गर्मी महसूस होती है।
खुला दरबार, बंद दलाली
सुबह 10 बजते ही थाना प्रभारी की कुर्सी बरामदे में। फरियादी सीधे सामने। बीच में न मुंशी, न सिपाही, न दलाल।, खुद बरामदे में जनता के बीच, कोई चैंबर , कोई पर्दा नहीं आधा घंटे का अल्टीमेटम, शिकायत मिलते ही आरोपी को कॉल। “30 मिनट में हाजिर हो, वरना जीप तेरे दरवाजे पर होगी।” जनता के सामने दोनों पक्ष सबको आमने-सामने बैठाकर सुनवाई।
ग्राम प्रधान व लेखपाल को मौके पर बुलाकर स्पाट वेरीफिकेशन झूठ बोला तो वही फटकार।केस निपटाने के बाद थाना प्रभारी का फरियादी को फोन। “मास्टर साहब, संतुष्ट हो? कोई दोबारा तंग करे तो मेरा नंबर है तुम्हारे पास।”खौफ का रिपोर्ट कार्ड 30 दिन में अपराधियों की कमर तोड़ दी है 137 फरियादियों ने दी दस्तक,120 मामलों में मौके पर सर्जिकल स्ट्राइक। 87% केस में इंसाफ थाने से ही विदा हुआ।38 घरेलू हिंसा केस,35 में पति ने थाने में ही पत्नी से गिड़गिड़ा कर माफी मांगी।वजह साफ है, छोटे अपराधी को थाने में ही सबक मिल रहा है।
दबंगों के लिए यमराज, गरीबों के लिए भगवान
रविवार को एक किसान अफसर के सामने पेश हुआ, बताया कि 5 साल से अपनी जमीन के लिए भटक रहा हूं, न्यायालय के आदेश है मगर कब्जा नहीं मिल रहा। दुबे ने आरोपी को बुलाया, दो थप्पड़ की जगह दो कागज दिखाए और खेल खत्म। किसान चीख पड़ा, “साहब, आप इंसान नहीं, अवतार हो।”
थाना प्रभारी दुबे का एलान-ए-जंग
“सुन लो शंकरगढ़ के अपराधियो। तुम्हारी हिस्ट्रीशीट मेरे दिमाग में है। या तो सुधर जाओ, या जिला बदर हो जाओ। मेरे थाने में गरीब की आह और अमीर की वाह, दोनों का वजन बराबर है। यहां इंसाफ बिकता नहीं, दिया जाता है। वो भी तुरंत।”थाना कमाई का अड्डा नहीं न्याय का मंदिर है। मेरी ड्यूटी 24 घंटे की है, फरियादी आधी रात को भी आएगा तो मैं सुनूंगा।
दबंग याद रख लें, शंकरगढ़ में गुंडई की एक ही सजा है हवालात। बता दूं कि अब हाल ये है कि थाने के 500 मीटर के दायरे में कोई दबंग बाइक भी तेज नहीं चलाता। चाय वाले से लेकर व्यापारी तक कहते हैं, साहब की वर्दी में यमराज बसते हैं, पर दिल में मां।शंकरगढ़ में अब पुलिस की परिभाषा बदल गई है। यहां खाकी देखकर लोग रास्ता नहीं बदलते, बल्कि रुककर सलाम करते हैं।
क्योंकि यहां वर्दी सिर्फ पहनी नहीं जाती, निभाई जाती है। शंकरगढ़ थाने में अब ना रिश्वत की खिड़की खुलती है ना दलालों की बोली लगती है यहां सिर्फ एक आवाज गूंजती है बोलो फरियादी क्या इंसाफ चाहिए? जहां जनता संतुष्ट वहां अपराध स्वयं कम।







