लखनऊ –
उत्तर प्रदेश की ग्राम पंचायतों में सत्ता परिवर्तन को लेकर सस्पेंस गहरा गया है। आगामी 26 मई को प्रदेश की ग्राम पंचायतों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है।
इस बीच पंचायतीराज विभाग द्वारा शासन को भेजे गए प्रस्ताव ने चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया है।
कार्यकाल खत्म होने में अब महज दो हफ्ते बचे हैं। विभाग ने स्पष्ट किया है कि 26 मई के बाद प्रधानों के वर्तमान वित्तीय अधिकार स्वतः समाप्त हो जाएंगे, जिसके बाद प्रशासकों की तैनाती अनिवार्य होगी।
सबसे बड़ी खबर यह है कि सरकार वर्तमान ग्राम प्रधानों को ही प्रशासक नियुक्त करने पर गंभीरता से विचार कर रही है। यदि ऐसा होता है, तो प्रधान ही “तदर्थ समिति” के अध्यक्ष के रूप में गाँव के विकास कार्यों और बैंक खातों का संचालन जारी रख सकेंगे।
प्रस्ताव में दूसरा विकल्प ब्लॉक स्तर के अधिकारियों (ADO पंचायत) को प्रशासक बनाने का भी है, जैसा कि पूर्व के वर्षों में होता आया है,गाँव में चल रहे करोड़ों के विकास कार्य, मनरेगा का भुगतान और सफाई कर्मियों का वेतन न रुके, इसके लिए सरकार जल्द से जल्द इस पर मुहर लगाना चाहती है।
सूत्रों की मानें तो मुख्यमंत्री कार्यालय इस पर अंतिम निर्णय 20 मई तक ले सकता है।
रिपोर्ट – विजयलक्ष्मी तिवारी









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