वाराणसी।
आगामी चुनावों की आहट के साथ ही वाराणसी की पांचों विधानसभा सीटों पर सियासी हलचल तेज हो गई है। पार्टियों के भीतर टिकट की जंग शुरू हो चुकी है, वहीं जनता के बीच भी यह सवाल गूंज रहा है—क्या पुराने चेहरों पर भरोसा कायम रहेगा या नए नेताओं को मौका मिलेगा?
वाराणसी दक्षिण: मजबूत पकड़ या बदलाव की मांग?
वाराणसी दक्षिण सीट पर भाजपा विधायक नीलकंठ तिवारी की पकड़ मजबूत मानी जा रही है, लेकिन अंबरीश सिंह भोला, दयाशंकर मिश्र दयालू और पूजा दीक्षित जैसे नए चेहरे चुनौती पेश कर रहे हैं।सपा, कांग्रेस भी अपने-अपने दावेदारों के साथ मैदान में सक्रिय हैं, जिससे मुकाबला दिलचस्प हो गया है।
सेवापुरी: अंदरूनी खींचतान ने बढ़ाया रोमांच
भाजपा विधायक नील रतन पटेल (नीलू) के सामने पार्टी के भीतर ही अदिति सिंह पटेल, दिलीप पटेल और धर्मेंद्र सिंह जैसे विकल्प खड़े हैं। सपा, अपना दल और कांग्रेस भी मजबूत दावेदारों के साथ समीकरण साधने में जुटी हैं।
रोहनिया: क्या बदलेगा चेहरा?
रोहनिया सीट पर अपना दल के विधायक सुनील पटेल के सामने इस बार चुनौती ज्यादा कड़ी दिख रही है। भाजपा और सपा दोनों ही नए चेहरों पर दांव लगाने की तैयारी में हैं, जिससे मुकाबला त्रिकोणीय हो सकता है।
शिवपुर: हर दल में टिकट की जंग
शिवपुर सीट पर भाजपा विधायक अनिल राजभर को पार्टी के भीतर से ही चुनौती मिल रही है।सपा और बसपा भी अपने संभावित उम्मीदवारों के जरिए समीकरण मजबूत करने में लगी हैं, जिससे यहां कड़ा मुकाबला तय माना जा रहा है।
अजगरा: अनुभव बनाम नई ऊर्जा
अजगरा सीट पर भाजपा विधायक त्रिभुवन राम की उम्र इस बार चुनावी मुद्दा बनती दिख रही है।यहां भाजपा, सपा और बसपा—तीनों दलों में नए और पुराने चेहरों के बीच जोरदार प्रतिस्पर्धा चल रही है।
क्या कहते हैं संकेत?
कुल मिलाकर वाराणसी की इन पांचों सीटों पर एक तरफ अनुभवी विधायकों की पकड़ है, तो दूसरी तरफ नए चेहरों की मजबूत दावेदारी।
पार्टी के अंदर ही बढ़ती प्रतिस्पर्धा ने टिकट वितरण को सबसे बड़ा फैक्टर बना दिया है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि 2027 का चुनाव वाराणसी में बेहद दिलचस्प और कांटे का होने वाला है, जहां जनता का मूड ही जीत-हार तय करेगा।







