प्रयागराज/वाराणसी, 04 अप्रैल:
वरिष्ठ नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक बेहद मानवीय और अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने वाराणसी लक्ष्मणपुर निवासी स्वर्गीय शैलेन्द्र सरदार के बुजुर्ग माता-पिता को उनके ही घर से बेदखल करने की कोशिशों पर तत्काल प्रभाव से अंतरिम रोक लगा दी है।
न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेंद्र की एकल पीठ ने सुरेंद्र नाथ सिंह व अन्य द्वारा दायर याचिका (संख्या 2271/2026) पर सुनवाई करते हुए यह राहत दी।
धोखाधड़ी और प्रताड़ना के गंभीर आरोप
मामले में 80 वर्षीय पति और 75 वर्षीय पत्नी ने आरोप लगाया कि उनकी विधवा बेटी रूचि सिंह ने धोखे से गिफ्ट डीड और अन्य दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करवा लिए। अब उन्हीं दस्तावेजों के आधार पर वह मकान पर पूरा मालिकाना हक जताते हुए बुजुर्गों को घर से निकालने की कोशिश कर रही है।
बुजुर्ग दंपत्ति का यह भी कहना है कि विवाद इतना बढ़ गया कि उनके साथ मारपीट की गई और घर की चाबियां तक छीनने का प्रयास हुआ। इस संबंध में 14 जनवरी 2026 को FIR भी दर्ज कराई गई थी।
निचली अदालत के फैसले पर हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी
इससे पहले वाराणसी के सिविल जज (सीनियर डिवीजन) ने 4 फरवरी 2026 को बिना दूसरे पक्ष को सुने कोई अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया था। इस पर हाईकोर्ट ने हस्तक्षेप करते हुए स्पष्ट कहा:
“यदि इस उम्र में बुजुर्गों को संरक्षण नहीं मिला, तो न्याय का उद्देश्य ही विफल हो जाएगा।”
कोर्ट के आदेश के प्रमुख बिंदु
• बेदखली पर रोक: अगली सुनवाई तक बुजुर्ग दंपत्ति को घर से नहीं निकाला जा सकेगा।
• यथास्थिति कायम: संपत्ति पर कोई तीसरे पक्ष का अधिकार नहीं बनाया जाएगा।
• नोटिस जारी: रूचि सिंह को अपना पक्ष रखने के लिए नोटिस दिया गया।
• अगली सुनवाई: 23 अप्रैल 2026 तय की गई।
मानवीय दृष्टिकोण की मिसाल
यह फैसला न सिर्फ एक परिवारिक विवाद में राहत है, बल्कि समाज में बुजुर्गों के अधिकारों और सम्मान की रक्षा का एक मजबूत संदेश भी देता है।







