फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि पर इस वर्ष का पहला चंद्रग्रहण तीन मार्च को लगने जा रहा है। धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। इस खगोलीय घटना को लेकर देशभर में तैयारियां शुरू हो गई हैं।
जानकारी के अनुसार चंद्रग्रहण की शुरुआत दोपहर 3:20 बजे होगी और इसका समापन शाम 6:47 बजे तक होगा। ग्रहण की अवधि लगभग तीन घंटे से अधिक रहेगी। परंपरा के अनुसार चंद्रग्रहण से नौ घंटे पूर्व सूतक काल प्रारंभ हो जाएगा। सूतक लगते ही मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाएंगे और पूजा-अर्चना स्थगित रहेगी।
धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक सूतक काल में भगवान की मूर्तियों को स्पर्श नहीं किया जाता है। और भोग-प्रसाद भी नहीं लगाया जाता। कई श्रद्धालु इस दौरान मंत्र जाप, पाठ और ध्यान करते हैं। ग्रहण समाप्ति के बाद स्नान-दान का विशेष महत्व बताया गया है।
ज्योतिषाचार्यों का कहना है। कि फाल्गुन पूर्णिमा पर लगने वाला यह चंद्रग्रहण आध्यात्मिक दृष्टि से विशेष फलदायी माना जाता है। वहीं वैज्ञानिक दृष्टिकोण से यह एक प्राकृतिक खगोलीय प्रक्रिया है। जिसमें पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है। और उसकी छाया चंद्रमा पर पड़ती है।
चंद्रग्रहण को लेकर मंदिरों, तीर्थस्थलों और धार्मिक संस्थानों ने श्रद्धालुओं के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करने शुरू कर दिए हैं। ग्रहण के समय गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है।
धार्मिक आस्था और वैज्ञानिक जिज्ञासा—दोनों ही दृष्टियों से यह चंद्रग्रहण खास रहने वाला है। अब सभी की निगाहें तीन मार्च पर टिकी हैं। जब आसमान में यह अद्भुत खगोलीय दृश्य दिखाई देगा।
रिपोर्ट – सुरेश कुमार शर्मा







