केराकत, जौनपुर थाना क्षेत्र केराकत अंतर्गत ग्राम पंचायत चकरामनगर (कनुवानी) में इंसाफ की सरकार में एक 85 वर्षीय वृद्धा पिछले एक वर्ष से भटक रही है। लेकिन न्याय अब भी कोसों दूर है। वृद्धा मुनेसरा देवी पत्नी छट्ठू ने जिलाधिकारी जौनपुर को प्रार्थना पत्र देकर अपने ही परिजनों पर जबरन कब्जा, मारपीट और धमकी देने का गंभीर आरोप लगाया है।
10 साल से रह रही थी, एक साल पहले दबंगों ने किया कब्जा
पीड़िता के अनुसार, उनके पुत्र दीनानाथ ने अपने हिस्से में उनके रहने के लिए अलग से कमरा और शौचालय बनवाया था, जहाँ वह लगभग 10 वर्षों से रह रही थीं। आरोप है। कि लगभग एक वर्ष पूर्व लालबहादुर, अजय, लालमनी व सुनीता ने मिलकर उन्हें मारपीट कर कमरे और शौचालय से बेदखल कर दिया और जबरन कब्जा कर लिया।
आज हालात यह हैं। कि 85 वर्ष की वृद्धा मड़हे में रहने को मजबूर है। बरसात, ठंड और बीमारी के बीच उनका जीवन बदहाल है।
आदेश के बाद भी नहीं छोड़ा कब्जा।
पीड़िता ने जिलाधिकारी, उपजिलाधिकारी केराकत और थाना प्रभारी से शिकायत की। सूत्रों के अनुसार सक्षम अधिकारियों द्वारा जांच के बाद विपक्षियों को कमरा और शौचालय खाली करने का आदेश भी दिया गया। लेकिन हैरानी की बात यह है। कि आदेश के बावजूद अब तक कब्जा बरकरार है।
इतना ही नहीं, वृद्धा का आरोप है। कि दबंग खुलेआम धमकी दे रहे हैं। और पुलिस को शिकायत देने के बावजूद कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही।\
सबसे बड़ा सवाल – आदेश कागज़ पर, तो कार्रवाई कहां है।
जब प्रशासनिक आदेश के बावजूद कब्जा नहीं हट रहा है। तो सवाल यह उठता है। कि
क्या स्थानीय पुलिस दबंगों के आगे बेबस है।
क्या एक 85 वर्षीय वृद्धा को न्याय दिलाना इतना कठिन क्यों हो रहा है।
आदेश के अनुपालन की जिम्मेदारी किसकी है।
डीएम ने दिया आश्वासन, अब नजर कार्रवाई पर
जिलाधिकारी ने शिकायत पत्र स्वीकार कर सक्षम अधिकारियों को जांचोपरांत उचित कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। लेकिन पीड़िता की हालत और अब तक की निष्क्रियता को देखते हुए ग्रामीणों में आक्रोश बढ़ रहा है।
वृद्धा का सवाल सीधा है।
“इस उम्र में मैं कहां जाऊं क्या मुझे न्याय नहीं मिलेगा।
अब देखना यह है। कि प्रशासन और पुलिस इस मामले में कितनी तत्परता दिखाती हैं। यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो यह मामला जिले में कानून-व्यवस्था और महिला सुरक्षा पर बड़ा सवाल बन सकता है।







