वाराणसी पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल ने कमिश्नरेट की कार्यप्रणाली को पूरी तरह आधुनिक और परिणामोन्मुखी बनाने के लिए कमर कस ली है। अपराध शाखा (Crime Branch) और ए.एच.टी. (AHTU) थाने की समीक्षा बैठक के दौरान कमिश्नर ने स्पष्ट कर दिया कि अब ढिलाई का दौर खत्म हो चुका है।
मुख्य बिंदु: नई कार्यशैली की शुरुआत
CBI की तर्ज पर जांच :कमिश्नर ने निर्देश दिया कि अपराध शाखा अब केवल फाइलों का ‘डंपिंग यार्ड’ नहीं रहेगी। इसकी कार्यप्रणाली अब केंद्रीय जांच एजेंसी (CBI) जैसी पेशेवर और सटीक होगी।
अपराधियों में खौफ, पीड़ितों को न्याय उन्होंने कहा कि जब कोई मामला क्राइम ब्रांच को सौंपा जाए, तो पीड़ित को न्याय की उम्मीद और अपराधियों के मन में “दूध का दूध और पानी का पानी” होने का डर बैठ जाना चाहिए।
एक्सपर्ट्स के हाथ में कमान अब विवेचना (Investigation) वही अधिकारी करेंगे जिन्हें कानून की बारीकियों और आधुनिक तकनीक (Tech-savvy) की गहरी समझ होगी।
लापरवाही पर ‘जीरो टॉलरेंस’ विवेचना में देरी या लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
सफलता की सराहना: 6 लापता बच्चियां बरामद
बैठक के दौरान कमिश्नर ने AHTU टीम की पीठ थपथपाई, जिन्होंने पिछले 3 वर्षों से लापता 6 बालिकाओं को सुरक्षित बरामद करने में सफलता हासिल की। आंकड़ों के मुताबिक, क्राइम ब्रांच ने पिछले साल 49 और इस साल जनवरी में अब तक 6 महत्वपूर्ण विवेचनाओं का गुणवत्तापूर्ण निस्तारण किया है।
तकनीक से लैस होगी वाराणसी पुलिस
कमिश्नर मोहित अग्रवाल ने डिजिटल साक्ष्य (Digital Evidence), सीसीटीवी फुटेज, और फॉरेंसिक जांच के अधिकतम उपयोग पर जोर दिया है। उन्होंने सहायक पुलिस आयुक्त (अपराध) को निर्देश दिया कि वे हर दिन लंबित मामलों की समीक्षा करें और रिपोर्ट सीधे उन्हें सौंपें
“हमारा लक्ष्य केवल केस सुलझाना नहीं, बल्कि न्याय की ऐसी मिसाल पेश करना है जिससे वाराणसी की जनता खुद को सुरक्षित महसूस करे।”
रिपोर्ट – जगदीश शुक्ला
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