माघ मास की पूर्णिमा को किया गया पवित्र स्नान सनातन परंपरा में आत्मशुद्धि और पुण्य का विशेष अवसर माना गया है.
गंगा, यमुना, सरस्वती तथा अन्य पावन नदियों में इस दिन स्नान कर श्रद्धालु तप, दान और संयम का संकल्प लेते हैं.
आस्था है कि माघ पूर्णिमा पर स्नान से मन, वाणी और कर्म की शुद्धि होती है.
यह वही काल है जब माघ मेला अपने उत्कर्ष पर होता है और साधु-संत, कल्पवासी तथा गृहस्थ एक साथ धर्माचरण करते हैं.
शीतल जल में किया गया यह स्नान धैर्य, तप और प्रकृति के साथ तादात्म्य का प्रतीक है.
रिपोर्ट – जगदीश शुक्ला







