निर्मल मति और निर्मल सोच प्राप्त करने के लिए रामलीला सबसे सशक्त माध्यम है, यह बात पूर्वांचल उत्तर प्रदेश के लोकप्रिय समाजसेवी एवं समाजसेवा के क्षेत्र में अनेकों पुरस्कारों से सम्मानित श्यामकांत शुक्ला (लहरी भइया) ने नहवाई, मांडा, प्रयागराज के रामलीला मंच से दर्शकों को संबोधित करते हुए कही।
उन्होंने तुलसीदास की दो चौपाईयों को उद्धृत करते हुए कहा कि –
जनक सुता जगजननि जानकी ।
अतिशय प्रिय करुणा निधान की ।।
ताके जुगपद कमल मनावउ ।
जासु कृपा निर्मल मति पावउ ।।
तुलसीदास जी ने माता जानकी के जुगल चरण कमलों की बंदना की है जिनकी कृपा से इंसान की सोच शुद्ध होकर निर्मल मति प्राप्त होती है।

निर्मल मति से निर्मल दृष्टि बनती है। निर्मल सोच बनती है। निर्मल विचार बनते हैं। निर्मल भावनाएं बनती है। फिर निर्मल संकल्प बनता है और कार्य भी निर्मल होता है। फिर परिणाम निर्मल और अपने पक्ष में आता है। जिससे व्यक्ति सफलता की सीढ़ियां चढ़ता जाता है। अगर व्यक्ति की मति और दृष्टि दूषित हुई तो परिणाम भयावह होगा और इंसान का भौतिक और आध्यात्मिक दोनों ढंग से पतन हो जाएगा ।
ज्ञात हो कि कल रात लहरी भइया श्री रामनाम संकीर्तन रामलीला समिति नहवाई, मांडा, प्रयागराज की रामलीला देखने पहुंचे। जहां पर लक्षण शक्ति की रामलीला का मंचन हुआं। मंच पर विशाल पुष्पहार से उनका स्वागत किया गया। उन्होंने भगवान श्री राम की आरती की, दर्शकों को संबोधित किया और नहवाई रामलीला समिति को 10100/- दस हजार एक सौ रुपये की सहयोग राशि प्रदान की।
रामलीला में राम के रोल में ओम तिवारी, लक्ष्मण के रोल में आयुष तिवारी, हनुमान के रोल में विष्णु शंकर द्विवेदी, मेघनाथ के रोल में बृजेश तिवारी और सुषेण वैद्य के रोल में राजकुमार तिवारी का अभिनय बहुत ही सराहनीय रहा। इस अवसर पर विकास तिवारी विक्की, ओमप्रकाश तिवारी, धीरज मिश्रा, गणेश बाबा गिरी, विनोद पांडेय, शुभम पाण्डेय के अलावा हजारों की तादात में दर्शक मौजूद थे।







