मैं आज तक राजनीतिक पोस्ट नहीं लिखता हूं क्योंकि मैं किसी दल या समूह का समर्थतक नहीं हु जो मुझे देश हित में अच्छा लगता है ओहि लिखता हूं! आंदोलन हर किसी का अधिकार है, लेकिन उस के आर में इश तरह का भाषा कभी बर्दाश नहीं क्या जाएगा आज मन बहुत विचलित है।
मैंने नेहा बोरा के बारे में आज तक कुछ नहीं लिखा। सोचा, हर व्यक्ति को अपनी बात रखने का, आंदोलन करने का अधिकार है।
लेकिन आज उनके बयान और उनकी सोच का जो मापदंड सामने आ रहा है, उसने दिल को बहुत दुखी किया है।
बांग्लादेश में जिस तरह से हिन्दुओं पर अत्याचार और नरसंहार हुआ, पूरी दुनिया ने देखा। उस घटना को आइकॉन बनाकर, उसी मॉडल को भारत में लागू करने की बात करना, भारत के कानून के तहत जेल में बंद लोगों को छुड़ाने की बात को अपना लक्ष्य बताना – क्या यह भारत के हित में है?
वो खुद कहती हैं कि मैं उसी दल का समर्थन करूंगी जो मुझे मेरे लक्ष्य तक ले जाएगा। यह लक्ष्य अगर देश को जोड़ने का होता तो हमें गर्व होता, लेकिन यह लक्ष्य अगर देश में नफरत और विभाजन बढ़ाने वाला है तो हर आम भारतीय को सोचना पड़ेगा।
एक छात्रा होकर डेढ़ करोड़ की गाड़ी में घूमना, भारत की छवि को दुनिया में धूमिल करना, कभी ज्ञानेश कुमार, कभी शिक्षा मंत्री को बहाना बनाकर, ब्राह्मण-पंडित समाज के लिए कहना कि “मंदिर में बलात्कार होता है, हम ब्राह्मणों से नफरत करते हैं” – यह किसी एक समाज का नहीं, पूरे भारत की संस्कृति का अपमान है।
मैं सभी धर्मों को समान करने वाला आदमी हूँ। मैं किसी धर्म को छोटा-बड़ा नहीं कहता। लेकिन बार-बार ब्राह्मण और हिन्दू को एक झुनझुना बनाकर राजनीति की रोटी सेंकना, यह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है। इसी से इन लोगों की रोजी-रोटी चलती है।
त्रिपुरा में आज जिस तरह घुसपैठियों ने हमारे पुलिस दल पर हमला कर हथियार छीनने की कोशिश की, वो चेतावनी है। वो दिन दूर नहीं जब हम आप सुरक्षित नहीं रहेंगे। घुसपैठ को रोकने के लिए भारत सरकार जो कदम उठा रही है, उससे किसी आम भारतीय को दर्द नहीं है, दर्द सिर्फ उन लोगों को है जो उनको संरक्षण देते हैं।
अगर कन्हैया कुमार के समय में ही ऐसी भारत-विरोधी विचारधारा पर संविधान के तहत सख्त सबक सिखाया गया होता, तो आज दूसरी नेहा बोरा पैदा नहीं होती। JNU जैसी जगहें आज विदेशी विचारधारा का अड्डा बनती जा रही हैं। वामपंथी विचारधारा के नाम पर युवाओं को शिक्षा से दूर ले जाकर, जाति में उलझाकर, भारत को खंड-खंड करने की एक सोची-समझी साजिश चल रही है।
इसका एक ही मकसद है – विश्व की नजर में भारत की छवि को धूमिल करना।
मुझे बहुत खेद के साथ कहना पड़ रहा है, अगर हम आज भी इस विचारधारा का समर्थन करते रहे, तो वह दिन दूर नहीं जब यही नफरत हमारे घर की मां-बहन-बेटियों तक पहुंचेगी।
सरकार से निवेदन है, ऐसे बयानों पर संज्ञान ले, जो समाज में नफरत फैलाते हैं।
देश जोड़ने से बनेगा, तोड़ने से नहीं।
आज जी भर-भर कर, हिन्दू को गाली दी – मंदिर में बलात्कार होता है, पंडित बलात्कार करता है। इस तरह हिन्दू देवी-देवताओं को, हिन्दू समाज को गाली देना निश्चित रूप से अब इनका टिकट कांग्रेस में फिक्स हो जाएगा। आप हिन्दू को गाली दो, हिन्दू देवी-देवता को गाली दो, ऐसे लोगों को कांग्रेस हाथों-हाथ लेकर कन्फर्म सीट दे देती है। घिन्न आती है ऐसी राजनीति करने वाले लोगों पर।







