काशी में अमर हुई मोदी–आबे की दोस्ती की कहानी, रुद्राक्ष में सजेगा जापान के पूर्व PM की यादों का कारवां

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वाराणसी।

काशी की धरती पर भारत-जापान की मैत्री और स्वर्गीय जापान के पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे की यादों को स्थायी स्वरूप मिल गया। सिगरा स्थित रुद्राक्ष अंतर्राष्ट्रीय सहयोग एवं सम्मेलन केंद्र में बुधवार को ‘आबे मेमोरियल कॉरिडोर’ का लोकार्पण जापान के पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे की पत्नी आकिए आबे और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संयुक्त रूप से किया। लोकार्पण के दौरान आकिए आबे अपने पति की काशी यात्रा की यादों को साझा करते हुए भावुक हो गईं।
‘अगर मेरे पति जीवित होते तो काशी जरूर आते’
आकिए आबे ने वर्ष 2015 की शिंजो आबे की काशी यात्रा को याद किया। उन्होंने बताया कि बनारस यात्रा के दौरान शिंजो आबे ने मां गंगा को बेहद श्रद्धा और ध्यान से देखा था। आकिए आबे ने कहा कि उनकी लंबे समय से इच्छा थी कि वह स्वयं काशी आएं और इस पवित्र नगरी को देखें। उन्होंने भावुक होकर कहा कि यदि शिंजो आबे आज जीवित होते तो इस खूबसूरत स्मृति गलियारे को देखकर बेहद प्रसन्न होते और काशी आने की इच्छा जरूर जताते।
मेमोरियल कॉरिडोर में वर्ष 2015 में शिंजो आबे की ऐतिहासिक काशी यात्रा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनके आत्मीय पलों की तस्वीरों और स्मृतियों को संजोया गया है।

काशी–क्योटो साझेदारी की भी यादें
आकिए आबे ने काशी और जापान के क्योटो शहर के बीच सांस्कृतिक रिश्तों को भी याद किया। उन्होंने बताया कि वर्ष 2014 में दोनों प्राचीन सांस्कृतिक शहरों के बीच पार्टनर सिटी समझौता हुआ था। इसी साझेदारी के बाद काशी में आधुनिक कन्वेंशन सेंटर विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ा।
108 रुद्राक्षों में झलकती भारत-जापान की सांस्कृतिक समानता
आकिए आबे ने रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर की स्थापत्य विशेषताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि केंद्र का नाम ‘रुद्राक्ष’ रखा गया है और इसकी बाहरी दीवारों पर 108 रुद्राक्ष लगाए गए हैं।
उन्होंने कहा कि 108 की संख्या भारत के साथ-साथ जापान में भी धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व रखती है। जापान में नववर्ष की पूर्व संध्या पर बौद्ध मंदिरों में 108 बार घंटी बजाने की परंपरा दोनों देशों की सांस्कृतिक समानताओं को दर्शाती है।

सेमीकंडक्टर से ग्रीन हाइड्रोजन तक बढ़ रहा सहयोग: योगी
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भारत-जापान संबंधों को सांस्कृतिक और आध्यात्मिक रिश्तों से आगे आर्थिक एवं तकनीकी सहयोग से जोड़ते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच साझेदारी अब सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ग्रीन हाइड्रोजन और क्रिटिकल मिनरल्स जैसे आधुनिक क्षेत्रों तक पहुंच रही है।
उन्होंने कहा कि भारत में करीब 1400 जापानी कंपनियां काम कर रही हैं। जापान के पास प्रिसिजन टेक्नोलॉजी और अनुभव है, जबकि भारत के पास प्रतिभाशाली युवा शक्ति और बड़ा बाजार है।
मुख्यमंत्री के अनुसार उत्तर प्रदेश में नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के निकट 500 एकड़ में ‘जापानी सिटी’ विकसित करने की दिशा में काम चल रहा है। जापानी निवेश को बढ़ावा देने के लिए इन्वेस्ट यूपी में यामानाशी डेस्क भी स्थापित किया गया है।

‘रुद्राक्ष भारत-जापान दोस्ती का अमर प्रतीक’
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आबे मेमोरियल कॉरिडोर उत्तर प्रदेश की जनता, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और देशवासियों की ओर से स्वर्गीय शिंजो आबे को श्रद्धांजलि है।उन्होंने कहा कि जापान ने काशी को रुद्राक्ष दिया और अब काशी उसी रुद्राक्ष के भीतर शिंजो आबे की स्मृतियों को संजो रही है।
भारत-जापान संबंधों और नरेंद्र मोदी तथा शिंजो आबे की मित्रता का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने गोस्वामी तुलसीदास की चौपाई—
“निज दुख गिरि सम रज करि जाना।मित्रक दुख रज मेरु समाना॥”का उल्लेख किया और कहा कि दोनों देशों के संबंध विश्वास और आपसी सहयोग पर आधारित हैं।
2027 में पूरे होंगे राजनयिक संबंधों के 75 वर्ष
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2027 में भारत और जापान के राजनयिक संबंधों के 75 वर्ष पूरे होंगे। ऐसे समय में आबे मेमोरियल कॉरिडोर दोनों देशों के ऐतिहासिक संबंधों और शिंजो आबे की काशी यात्रा की यादों को संजोने वाला महत्वपूर्ण स्मृति स्थल बनेगा।
कार्यक्रम में राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार रवीन्द्र जायसवाल, महापौर अशोक कुमार तिवारी, जिला पंचायत अध्यक्ष पूनम मौर्य, कैंट विधायक सौरभ श्रीवास्तव सहित जापान से आए प्रतिनिधिमंडल के सदस्य, काशी के गणमान्य नागरिक और स्कूली बच्चे मौजूद रहे।

रिपोर्ट विजयलक्ष्मी तिवारी

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