रसड़ा रेलवे स्टेशन की बदलेगी तस्वीर? ट्रेनों के ठहराव समेत पांच सूत्रीय मांगों को लेकर रेल मंत्रालय पहुंचा प्रतिनिधिमंडल

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बलिया। रसड़ा रेलवे स्टेशन पर ट्रेनों के ठहराव और यात्री सुविधाओं को लेकर व्यापारि कल्याण समिति ने अब रेल मंत्रालय का दरवाजा खटखटाया है। सोमवार को हर्ष कुमार सोनी के नेतृत्व में समिति के प्रतिनिधिमंडल ने नई दिल्ली में रेल मंत्रालय, भारत सरकार को पांच सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौंपकर क्षेत्र की रेल समस्याओं के शीघ्र समाधान की मांग की।

 

रसड़ा से आसपास के क्षेत्रों के यात्रियों को होती है परेशानी

 

समिति के संरक्षक सुरेश चन्द ने बताया कि रसड़ा रेलवे स्टेशन नगर पालिका परिषद रसड़ा, नगरा, कासिमाबाद सहित आसपास के गांवों और तहसील क्षेत्र के लोगों के लिए आवागमन का महत्वपूर्ण केंद्र है। बड़ी संख्या में लोग रोजाना रेल सेवा पर निर्भर हैं, लेकिन पर्याप्त ट्रेनों के ठहराव और मूलभूत यात्री सुविधाओं के अभाव में यात्रियों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

 

इन प्रमुख ट्रेनों के ठहराव की मांग

 

ज्ञापन में 15715/15716, 13509/13510, 19053/19054 और 12527/12528 समेत अन्य संबंधित ट्रेनों का रसड़ा रेलवे स्टेशन पर कम से कम दो मिनट का ठहराव सुनिश्चित करने की मांग की गई है।

 

समिति का कहना है कि इन ट्रेनों के ठहराव से रसड़ा समेत आसपास के ग्रामीण और तहसील क्षेत्र के यात्रियों को काफी सुविधा मिलेगी। साथ ही क्षेत्र की रेल कनेक्टिविटी से जुड़ी समस्याओं को भी कम किया जा सकेगा।

 

बंद छपरा–मऊ पैसेंजर ट्रेन फिर चलाने की मांग

व्यापार कल्याण समिति ने पूर्व में बंद की गई 55017/55018 छपरा–मऊ–छपरा पैसेंजर ट्रेन का संचालन दोबारा शुरू करने की मांग भी की है। समिति के अनुसार इस ट्रेन के पुनः संचालन से स्थानीय यात्रियों, छोटे व्यापारियों और दैनिक आवागमन करने वाले लोगों को बड़ी सुविधा मिल सकती है।

यात्री सुविधाएं बहाल करने पर भी जोर

ज्ञापन में रसड़ा रेलवे स्टेशन पर मूलभूत यात्री सुविधाओं को बहाल करने और क्षेत्र की अन्य रेल समस्याओं का समाधान करने की मांग की गई है। समिति ने रेल मंत्रालय से सभी मांगों पर जनहित में गंभीरता से विचार करते हुए शीघ्र आवश्यक कार्रवाई करने का आग्रह किया।

प्रतिनिधिमंडल ने मांगों पर की गई कार्रवाई से समिति को अवगत कराने का भी अनुरोध किया है। अब क्षेत्रीय यात्रियों की नजर रेल मंत्रालय की ओर से इन मांगों पर होने वाली कार्रवाई पर टिकी है।

 

 

 

रिपोर्ट विजय कुमार सोनी

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