आगरा: UGC रोलबैक की मांग को लेकर चल रहे विरोध ने अब बड़ा रूप ले लिया है। 18 सितंबर को जिला मुख्यालय पर ट्रैक्टर मार्च और कलेक्ट्रेट घेराव की घोषणा के बाद आगरा प्रशासन ने पूरी तरह से कमर कस ली है।
सूत्रों के मुताबिक आंदोलनकारियों ने दावा किया है कि 5 हजार ट्रैक्टर-ट्रॉलियों और करीब 50 हजार लोगों के साथ जिला मुख्यालय की ओर कूच किया जाएगा। इस दौरान कलेक्ट्रेट घेराव का भी ऐलान किया गया है। 3211इसी घोषणा के बाद रातों-रात प्रशासन एक्शन मोड में आ गया।
बड़ी बातें –
1. चप्पे-चप्पे पर लगाई फोर्स: प्रशासन ने तड़के सुबह से ही जिले की सीमाओं और शहर के अंदरूनी इलाकों में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया है। जानकारी के अनुसार किसी बड़े टकराव से बचने के लिए देर रात ही थानों से फोर्स को रवाना कर दिया गया था।
2. किसान नेताओं का हाउस अरेस्ट: खुफिया इनपुट के आधार पर तमाम किसान नेताओं और विरोध से जुड़े कई संगठनों के पदाधिकारियों को घरों में ही नजरबंद कर दिया गया है। कई जगह पुलिस उनके घर के बाहर पहरा दे रही है ताकि वे मार्च के लिए न निकल सकें।
3. हर चौराहे पर बैरिकेडिंग: इससे पहले भी सिस्टम सुधार संगठन के ट्रैक्टर मार्च को रोकने के लिए पुलिस ने रास्ते में बुलडोजर लगाकर बैरिकेडिंग कर दी थी। उसी तर्ज पर इस बार भी एत्मादपुर, कुबेरपुर, बरहन रोड, रामबाग, प्रतापपुरा, रमाडा होटल कट और कलेक्ट्रेट के सभी एंट्री पॉइंट्स पर पुलिस और पीएसी तैनात है। adcb
4. गांव-गांव जनसंपर्क से प्रशासन टेंशन में: बताया जा रहा है कि प्रस्तावित कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए आंदोलन से जुड़े कार्यकर्ता गांव-गांव पहुंचकर जनसंपर्क अभियान चला रहे हैं। इसी को देखते हुए प्रशासन ने एहतियातन धारा 144 लागू करने और ड्रोन से निगरानी की तैयारी भी कर ली है।
फिलहाल पूरे जिले में तनाव का माहौल है। आंदोलनकारी कह रहे हैं कि अगर उन्हें रोका गया तो वे जहां रोके जाएंगे वहीं अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ जाएंगे।
प्रशासन का कहना है कि शांति व्यवस्था बनाए रखना पहली प्राथमिकता है, किसी को भी कानून हाथ में नहीं लेने दिया जाएगा।







