जौनपुर
जिलाधिकारी सैमुअल पाल एन. द्वारा बारिश से क्षतिग्रस्त सड़कों को प्राथमिकता के आधार पर दुरुस्त कराने और संबंधित विभागों को तीन दिन के भीतर खराब सड़कों को ठीक कराने के निर्देश दिए जाने के बाद भी शहर के बलुआघाट स्थित केरारकोट मोहल्ले की जर्जर गली जिम्मेदार विभागों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रही है।
केरारकोट मोहल्ले में मस्जिद साहाबा से लेकर मस्जिद उमर बिन खताब तक की पूरी गली लंबे समय से क्षतिग्रस्त बताई जा रही है। जगह-जगह बड़े गड्ढे होने के कारण पैदल चलना तक मुश्किल हो गया है। बारिश के दिनों में स्थिति और गंभीर हो जाती है। स्थानीय लोगों के मुताबिक आए दिन बुजुर्ग, बच्चे, महिलाएं और स्कूल जाने वाले बच्चे गड्ढों में गिरकर चोटिल हो रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है। कि इस मार्ग का निर्माण वर्ष 2018 में तत्कालीन चेयरमैन दिनेश टंडन के कार्यकाल में कराया गया था। इसके बाद से सड़क की समुचित मरम्मत अथवा पुनर्निर्माण नहीं होने के कारण इसकी हालत लगातार खराब होती चली गई।
सबसे बड़ा सवाल यह है। कि जब जिलाधिकारी ने जिले की खराब सड़कों को तीन दिन में ठीक कराने का स्पष्ट निर्देश दिया है। तो क्या केरारकोट की यह जर्जर गली संबंधित अधिकारियों की नजर में नहीं है।
क्या किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार कर रहे है। जिम्मेदार विभाग
स्थानीय नागरिकों का कहना है। कि सड़क की स्थिति पहले ही दुर्घटना का कारण बन रही है। यदि समय रहते मरम्मत नहीं कराई गई तो किसी गंभीर हादसे के बाद जिम्मेदारी तय करने का कोई औचित्य नहीं रहेगा।
मोहल्ला वासियों ने अपनी समस्या को लेकर जिलाधिकारी को दिए जाने वाले आवेदन पर सामूहिक रूप से हस्ताक्षर भी किए हैं। स्थानीय नागरिकों के हस्ताक्षरयुक्त आवेदन की प्रति इस समाचार के साथ संलग्न की जा रही है।
अब देखना यह है। कि जिलाधिकारी के तीन दिन के निर्देश के बाद नगर पालिका परिषद जौनपुर और संबंधित विभाग के अधिकारी इस जर्जर मार्ग की सुध लेते हैं। या फिर आदेश और निर्देश फाइलों तक ही सीमित रह जाते हैं।
जनता का सीधा सवाल है। जब डीएम का आदेश स्पष्ट है। तो केरारकोट की इस जर्जर गली का निर्माण कब होगा।







