वाराणसी
काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) परिसर में 33 वृक्षों की अवैध कटाई के मामले में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) द्वारा बरकरार रखी गई करीब ₹2.65 करोड़ की पेनल्टी को लेकर छात्र समुदाय ने विश्वविद्यालय प्रशासन के समक्ष गंभीर सवाल उठाए हैं। इस संबंध में छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन को मांग-पत्र सौंपने के साथ ही रजिस्ट्रार से मुलाकात कर जुर्माने की राशि के भुगतान और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई को लेकर स्पष्ट जानकारी मांगी।
छात्रों के अनुसार, मुलाकात के दौरान रजिस्ट्रार से सीधा सवाल किया गया कि NGT द्वारा लगाए गए जुर्माने की राशि छात्रों की फीस से चुकाई जाएगी अथवा मामले के लिए जिम्मेदार अधिकारियों से व्यक्तिगत रूप से वसूली की जाएगी। छात्रों का आरोप है कि इस सवाल का स्पष्ट जवाब देने के बजाय रजिस्ट्रार ने कहा कि विश्वविद्यालय NGT के आदेश के विरुद्ध रिव्यू में भी जा सकता है। छात्रों का कहना है कि यह उनके पूछे गए सवाल का सीधा उत्तर नहीं था।

इसके बाद छात्र समुदाय की ओर से विश्वविद्यालय प्रशासन से इस संबंध में लिखित एवं आधिकारिक बयान मांगा गया, लेकिन छात्रों के मुताबिक अब तक उन्हें कोई स्पष्ट लिखित जवाब नहीं दिया गया है।
छात्रों ने कहा कि प्रशासन की चुप्पी और गोलमोल जवाब से यह आशंका और मजबूत होती है कि कहीं जुर्माने की राशि छात्रों की फीस अथवा विश्वविद्यालय के सामान्य बजट से चुकाने की तैयारी तो नहीं की जा रही है। छात्रों ने इस संबंध में BHU अधिनियम, 1915 की धारा 7C(3) तथा Lucknow Development Authority बनाम M.K. Gupta (1994) में निर्धारित सिद्धांतों का हवाला देते हुए प्रशासन से अपनी स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है।

छात्र समुदाय ने विश्वविद्यालय प्रशासन को सात दिनों के भीतर स्पष्ट, लिखित और सार्वजनिक बयान जारी करने की मांग की है कि ₹2.65 करोड़ की पेनल्टी किस स्रोत से भरी जाएगी तथा 33 वृक्षों की कटाई के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जा रही है। छात्रों ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने समयसीमा के भीतर स्पष्ट जवाब नहीं दिया तो वे शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन करने के लिए बाध्य होंगे।
छात्रों ने यह भी आरोप लगाया कि उन्होंने कुलपति से अवैध पेड़ कटाई, लकड़ी चोरी और विश्वविद्यालय के फंड के कथित दुरुपयोग की जांच के लिए स्वतंत्र कमेटी गठित करने की मांग की थी, लेकिन इसके बजाय विश्वविद्यालय प्रशासन ने छात्रों के खिलाफ ही कमेटी गठित कर दी। छात्रों ने कहा कि वे ऐसी कमेटियों से डरने वाले नहीं हैं।
छात्रों ने स्पष्ट शब्दों में कहा, “गलत के खिलाफ आवाज उठाना और छात्रहितों की बात करना यदि अपराध है, तो यह अपराध हम करते रहेंगे। हम पारदर्शिता, जवाबदेही और न्याय की मांग से पीछे नहीं हटेंगे।”
इंकलाब जिंदाबाद!
जारीकर्ता:
सत्यम सिंह
अमन मौर्या
अभिजीत सिंह
हिमांशु राय
विवर्त अनुराग










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