गोरखपुर
गोरखनाथ मंदिर की सुरक्षा में वर्षों तक अपनी वफादारी, सतर्कता और बहादुरी का परिचय देने वाला पुलिस विभाग का जांबाज साथी सब इंस्पेक्टर रैंक का स्नाइफर डॉग ‘वेनमोर’ मंगलवार सुबह हमेशा के लिए खामोश हो गया। पिछले चार महीनों से कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से लड़ रहे वेनमोर ने सुबह करीब 6 बजे अंतिम सांस ली। उसके जाने की खबर से पुलिस महकमे की आंखें नम हो गईं।
जब उसके पार्थिव शरीर को अंतिम विदाई दी जा रही थी, तो यह सिर्फ एक प्रशिक्षित श्वान की विदाई नहीं थी, बल्कि उस सच्चे प्रहरी को सलाम था जिसने बिना किसी स्वार्थ के वर्षों तक गोरखनाथ मंदिर और हजारों श्रद्धालुओं की सुरक्षा का जिम्मा निभाया। एसएसपी डॉ. कौस्तुभ ने स्वयं उसे कंधा दिया। पुलिस लाइन में पूरे सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई और हर मौजूद पुलिसकर्मी की आंखों में अपने इस साथी को खोने का दर्द साफ दिखाई दे रहा था।
9 वर्षीय जर्मन शेफर्ड वेनमोर वर्ष 2018 में मध्य प्रदेश के बीएसएफ टेकनपुर से गोरखपुर आया था। महज एक वर्ष की उम्र में उसने कठिन प्रशिक्षण लिया और जल्द ही अपनी असाधारण सूंघने की क्षमता से डॉग स्क्वॉड का सबसे भरोसेमंद स्नाइफर बन गया।
हर सुबह और हर शाम वह गोरखनाथ मंदिर पहुंचता, पूरे परिसर की बारीकी से जांच करता और किसी भी संदिग्ध विस्फोटक की भनक मिलते ही अपनी टीम को सतर्क कर देता। उसकी सतर्कता ने न जाने कितनी संभावित घटनाओं को टालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वह बोल नहीं सकता था, लेकिन उसकी वफादारी, अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा हर दिन बहुत कुछ कह जाती थी।
बीमारी ने पिछले चार महीनों से उसके कदम जरूर रोक दिए थे, लेकिन उसके जज्बे को कभी कमजोर नहीं कर सकी। डॉक्टरों की लगातार निगरानी में उसका इलाज चलता रहा, मगर आखिरकार वह जिंदगी की जंग हार गया।
वेनमोर अब इस दुनिया में नहीं है, लेकिन गोरखनाथ मंदिर की सुरक्षा में निभाई गई उसकी सेवा, उसकी निष्ठा और उसका मौन समर्पण हमेशा याद रखा जाएगा। वह सिर्फ पुलिस विभाग का एक स्नाइफर डॉग नहीं था, बल्कि वर्दी पहनने वाले हर जवान का वफादार साथी और गोरखपुर की सुरक्षा का एक मूक प्रहरी था।
सलाम वेनमोर… तुम्हारी वफादारी और सेवा को गोरखपुर कभी नहीं भूलेगा।











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