वाराणसी:
गोमती जोन की तेज-तर्रार डीसीपी नीतू कादयान, जिन्हें शहर में ‘लेडी सिंघम’ के नाम से जाना जाता है, ने एक बार फिर अपने सख्त और संवेदनशील पुलिसिंग का दम दिखाया है। मनीष सिंह हत्याकांड में ताबड़तोड़ कार्रवाई करते हुए पुलिस ने 4 मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे पहुंचा दिया।
घटना के तुरंत बाद डीसीपी नीतू कादयान खुद पीड़ित परिवार से मिलीं, उन्हें न्याय का भरोसा दिलाया और साफ कहा—“दोषी कोई भी हो, बख्शा नहीं जाएगा।” उनके इसी दृढ़ संकल्प का असर रहा कि महज कुछ घंटों में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए मनोज प्रजापति, हरिश्चंद्र राजभर, योगेंद्र और अभिषेक उर्फ बुद्धू को धर दबोचा।
🔹 कैसे हुआ वारदात?
26 अप्रैल को एक मामूली सड़क हादसे के बाद भीड़ का गुस्सा इस कदर भड़का कि चालक मनीष सिंह को बेरहमी से पीट दिया गया। गंभीर हालत में अस्पताल ले जाए गए मनीष की इलाज के दौरान मौत हो गई।
🔹 ‘लेडी सिंघम’ की रणनीति
मामले की गंभीरता को समझते हुए नीतू कादयान ने क्राइम ब्रांच और थाना पुलिस की संयुक्त टीम बनाई और खुद मॉनिटरिंग शुरू की। उनके नेतृत्व में प्रभारी निरीक्षक अतुल कुमार सिंह और टीम ने घेराबंदी कर आरोपियों को दबोच लिया।
🔹 सख्त संदेश
इस कार्रवाई से साफ हो गया है कि वाराणसी पुलिस अब किसी भी तरह की भीड़ हिंसा या कानून हाथ में लेने वालों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस पर काम कर रही है।
पुलिस के मुताबिक, बाकी आरोपियों की तलाश जारी है और जल्द ही पूरे मामले का खुलासा कर सभी दोषियों को सजा दिलाई जाएगी।
वाराणसी में ‘लेडी सिंघम’ का यह एक्शन न सिर्फ न्याय की दिशा में बड़ा कदम है, बल्कि कानून व्यवस्था पर भरोसा भी मजबूत करता है।











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