मीरजापुर। उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ के दिशा-निर्देशों के अनुपालन में 30 सितंबर 2026 को गांधी जयंती के अवसर पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, मीरजापुर के तत्वावधान में जनपद के विभिन्न विद्यालयों में पोक्सो अधिनियम, 2012 के संबंध में विशेष विधिक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए।
इसके अंतर्गत पीठासीन अधिकारी, मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण सत्य प्रकाश और सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, मीरजापुर आनंद कुमार द्वारा डॉ. सरला सराफ जन विद्यालय, मीरजापुर में, आनंद कुमार द्वारा राजकीय इंटर महाविद्यालय, मीरजापुर में, अपर जनपद न्यायाधीश प्रथम संतोष कुमार गौतम द्वारा जेसी कन्या इंटर महाविद्यालय, मीरजापुर में, सिविल न्यायाधीश (वरिष्ठ श्रेणी) गरिमा सिंह द्वारा महर्षि दयानंद बालिका इंटर महाविद्यालय में,

अपर सिविल न्यायाधीश (वरिष्ठ श्रेणी) पूजा द्वारा आदर्श बालिका इंटर महाविद्यालय, मीरजापुर में, न्यायिक दंडाधिकारी विजय कुमार गौतम द्वारा बसंत विद्यालय इंटरमीडिएट महाविद्यालय, मीरजापुर में, सिविल न्यायाधीश (कनिष्ठ श्रेणी) / त्वरित विचारण न्यायालय अभिषेक सिंह द्वारा माता प्रसाद माता भीख इंटर महाविद्यालय, मीरजापुर में तथा जनपद के अन्य विद्यालयों में पराविधिक स्वयंसेवकों द्वारा कार्यक्रम आयोजित किए गए।
कार्यक्रमों में छात्र-छात्राओं को लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम, 2012 के प्रमुख प्रावधानों, बालकों के विधिक अधिकारों, सुरक्षित और असुरक्षित स्पर्श में अंतर, बाल यौन शोषण की पहचान, अपराध की सूचना देने की प्रक्रिया तथा अधिनियम के अंतर्गत निर्धारित कानूनी परिणामों के बारे में सरल और व्यावहारिक जानकारी दी गई।
विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यालयों में अध्ययनरत बच्चों को बताया गया कि 18 वर्ष से कम आयु के किसी भी बच्चे के साथ यौन संबंध बनाना या बहला-फुसलाकर अपने साथ ले जाना अपराध की श्रेणी में आता है, भले ही उस बच्चे ने सहमति दी हो। 18 वर्ष से कम आयु के बच्चे की सहमति का कानून में कोई महत्व नहीं होता। उसके साथ सहमति से बनाए गए संबंध भी अपराध की श्रेणी में आते हैं।
बच्चों को यह संदेश दिया गया कि 18 वर्ष से कम आयु के प्रत्येक बालक-बालिका की सुरक्षा और संरक्षण कानून की प्राथमिकता है तथा पोक्सो अधिनियम के प्रावधानों की जानकारी बच्चों को सुरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। साथ ही बाल सहायता क्रमांक 1098, पुलिस सहायता क्रमांक 112 और निःशुल्क विधिक सहायता की उपलब्धता के बारे में भी अवगत कराया गया।
सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, मीरजापुर आनंद कुमार ने कहा कि बच्चे देश के भविष्य हैं, इसलिए उनकी सही देखभाल, सही परवरिश और सही ज्ञान बहुत आवश्यक है। केवल पढ़ाई से बेहतर भविष्य नहीं बनाया जा सकता। सामाजिक, मानसिक और शारीरिक ज्ञान की बहुत आवश्यकता है, विशेषकर आज के आधुनिक चल दूरभाष और संदेश माध्यमों के युग में,
जहां बच्चों को हर समय अनावश्यक सामग्री बड़ी आसानी से उपलब्ध हो जाती है, जिसमें सही कम और गलत अधिक है। हर बच्चे को सुरक्षित, खुशहाल और सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अधिकार है। हर बच्चे की सुरक्षा केवल माता-पिता की जिम्मेदारी नहीं है, यह हम सबकी जिम्मेदारी है।







