अमेरिकी टैरिफ से कालीन उद्योग पर बढ़ सकता है दबाव, हुनर बचाने पर जोर

Picture of Shauryanewsindia220@gmail.com

Shauryanewsindia220@gmail.com

FOLLOW US:

Share

भदोही। अमेरिका की व्यापार नीति और संभावित टैरिफ को लेकर कालीन उद्योग से जुड़े लोगों में चिंता है। उद्योग जगत का कहना है कि अमेरिका भारतीय हस्तनिर्मित कालीनों का प्रमुख बाजार है, ऐसे में शुल्क बढ़ने से निर्यात और रोजगार प्रभावित हो सकते हैं।

कालीन उद्योग से जुड़े यादवेंद्र कुमार राय और आलोक बरनवाल ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में अमेरिका जैसे महत्वपूर्ण बाजार को लेकर सरकार और उद्योग को गंभीरता से रणनीति बनानी होगी। उन्होंने बताया कि बढ़ती लागत, बुनकरों की कमी, नई पीढ़ी का पारंपरिक हुनर से दूर होना और मशीन से बने सस्ते उत्पाद कालीन उद्योग के सामने बड़ी चुनौतियां हैं।

उन्होंने कहा कि महिलाओं को प्रशिक्षण देकर कालीन उद्योग से जोड़ना इस पारंपरिक हुनर को बचाने का प्रभावी माध्यम हो सकता है। इसके लिए ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक से अधिक ट्रेनिंग सेंटर खोलने और रोजगारपरक योजनाओं से कालीन उद्योग को जोड़ने की जरूरत है।

वहीं, 50वें इंडिया कार्पेट एक्सपो की गोल्डन जुबली को उन्होंने उद्योग के लिए ऐतिहासिक अवसर बताते हुए खुशी जताई और उम्मीद व्यक्त की कि सरकार के सहयोग से भदोही का कालीन उद्योग आगे भी रोजगार और निर्यात का मजबूत माध्यम बना रहेगा।

रिपोर्ट फारूक जाफरी

Leave a Comment

सबसे ज्यादा पड़ गई