विंध्याचल। विंध्याचल में पहली बार आयोजित ऐतिहासिक वैदिक संदेश यात्रा रविवार को भव्य एवं धार्मिक वातावरण में संपन्न हुई। मां विंध्यवासिनी देवी मंदिर प्रांगण से सुबह 10 बजे यात्रा का शुभारंभ हुआ। यात्रा पुरानी वीआईपी मार्ग, राम-जानकी मंदिर, स्टेट बैंक चौराहा, बावली चौराहा और बंगाली चौराहा होते हुए विंध्य रेजिडेंसी पहुंची।
यात्रा में करीब 500 बटुकों के साथ विभिन्न प्रांतों से आए विद्वान एवं आचार्यगण शामिल हुए। यात्रा के मार्ग में जगह-जगह लोगों ने पुष्पवर्षा एवं स्वागत कर वैदिक संस्कृति के संदेश का अभिनंदन किया। प्रथम दिन आयोजित कार्यक्रम के मुख्य अतिथि उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य रहे।
वैदिक संदेश यात्रा में हाथी, घोड़ा, धमाल ढोल , डमरु, मां विंध्यवासिनी देवी जी की मूर्ति, भगवा झंडा, एक रंग महिलाओं की साड़ी, तथा एक साथ इतने वेद बटुकों के कारण रहा आकर्षण का केंद्र।
महर्षि सांदीपनि राष्ट्रीय वेद विद्या प्रतिष्ठान, उज्जैन (शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार) एवं श्री मां विंध्यवासिनी श्रवण वेद पाठशाला समिति, मीरजापुर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित त्रिदिवसीय क्षेत्रीय वैदिक सम्मेलन के तहत वैदिक संदेश यात्रा निकाली गई। इसका उद्देश्य वैदिक परंपरा के संरक्षण एवं संवर्धन के साथ जन-जन तक वैदिक संस्कृति और ज्ञान का संदेश पहुंचाना रहा।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि कार्यक्रम के संयोजक पंडित अगस्त्य द्विवेदी ने प्रयागराज स्थित महर्षि भारद्वाज वेद विद्यालय से शिक्षा-दीक्षा प्राप्त की है। उन्हीं के माध्यम से उन्हें इस तीन दिवसीय कार्यक्रम की जानकारी मिली। उन्होंने कहा कि तीनों दिन उपस्थित रहना उनके लिए संभव नहीं है, लेकिन उद्घाटन कार्यक्रम में शामिल होना अपना सौभाग्य मानते हैं। उन्होंने विद्यालय के प्राचार्य, आचार्यों और सभी बटुकों का अभिवादन किया।
उन्होंने कहा कि वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के बाल स्वयंसेवक रहे हैं और शाखा में कही जाने वाली दो पंक्तियां आज सभी के सामने रखना चाहते हैं—
“वेदों का यह देश हमारा,
सुंदर स्वर्ग समान है।
इसकी नदियों में अमृत है,
कण-कण में भगवान है।”
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि गंगा के पावन तट पर स्थित विंध्याचल को आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। मां विंध्यवासिनी यहां साक्षात विराजमान हैं। मां काली के मंदिर में दर्शन करने का भी उन्हें सौभाग्य मिला। द्वापर युग से जुड़ी मान्यताओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि योगमाया के रूप में मां अष्टभुजा भी यहीं विराजमान हैं।
उन्होंने महर्षि सांदीपनि राष्ट्रीय वेद विद्या प्रतिष्ठान, उज्जैन का उल्लेख करते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण, बलराम और सुदामा की शिक्षा एवं मित्रता का प्रसंग इसी परंपरा से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि वेदों में निहित ज्ञान भारत की अमूल्य धरोहर है और इसकी रक्षा करना हम सभी का दायित्व है।
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि वेद पाठशाला में शिक्षा प्राप्त करने वाला प्रत्येक बटुक लोक कल्याण की प्रार्थना करता है। वेदों की गूंज अनंत काल तक भारत भूमि पर सुनाई देती रहेगी। उन्होंने कहा कि वेद परंपरा के संरक्षण में बाधाएं डालने वाले कई लोग आए और चले गए, लेकिन वैदिक परंपरा निरंतर आगे बढ़ती रही।
उन्होंने बताया कि उज्जैन स्थित राष्ट्रीय सांदीपनि वेद विद्या प्रतिष्ठान से देशभर के करीब 100 वेद विद्यालय जुड़े हुए हैं। कई स्थानों पर नए वेद विद्यालय भी प्रारंभ हुए हैं और यह परंपरा लगातार आगे बढ़ रही है।
केंद्र सरकार की पहल का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने वेदों में निहित ज्ञान और परंपरा के संरक्षण पर विशेष ध्यान दिया है। उन्होंने कहा कि वेदों में ऐसा ज्ञान है, जो भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा की अमूल्य धरोहर है। इस ज्ञान को लुप्त होने से बचाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि पूर्ववर्ती सरकारों के दौरान तुष्टिकरण की राजनीति के कारण कई क्षेत्रों में बाधाएं आईं, लेकिन अब वैदिक परंपरा के संरक्षण और संवर्धन के लिए निडर होकर कार्य किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार भी वैदिक संस्कृति और धार्मिक स्थलों के विकास के लिए प्रभावी ढंग से कार्य कर रही है। मां विंध्यवासिनी धाम की व्यवस्थाओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि पहले की तुलना में आज विंध्याचल में श्रद्धालुओं के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध हैं। प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु मां के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं और उनके आवागमन, दर्शन एवं ठहरने की बेहतर व्यवस्था की गई है।
काशी विश्वनाथ धाम का उल्लेख करते हुए उपमुख्यमंत्री ने कहा कि वह विश्व हिंदू परिषद में संगठन मंत्री के रूप में कार्य करते समय परम पूज्य अशोक सिंघल के साथ जुड़े रहे। उन्होंने कहा कि अशोक सिंघल की अंतिम इच्छा थी कि वैदिक शिक्षा घर-घर तक पहुंचे। उन्होंने कहा कि उन्हें ऐसे महान व्यक्तित्व के साथ कार्य करने का अवसर मिला, यह उनके लिए सौभाग्य की बात है।
उन्होंने काशी विश्वनाथ मंदिर की पुरानी व्यवस्था को याद करते हुए कहा कि पहले बाबा विश्वनाथ के दर्शन के लिए छोटी गलियों से होकर जाना पड़ता था और श्रद्धालुओं को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। आज धाम में लाखों श्रद्धालुओं के लिए व्यवस्थित दर्शन और सुविधाओं की व्यवस्था की गई है।
“भारत की धरती के कण-कण में भगवान का वास है, नदियों में अमृत की धारा” — केशव प्रसाद मौर्य
उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि यह पूरे भारतवर्ष के लिए सौभाग्य की बात है कि जब भारत की सांस्कृतिक विरासत की बात होती है तो उसमें आज के भारत के साथ पाकिस्तान और बांग्लादेश में शामिल रहे भू-भागों की ऐतिहासिक विरासत भी जुड़ी हुई है।
उन्होंने कहा कि अखंड भारत की कल्पना और उसकी प्राचीन सांस्कृतिक परंपरा में वेदों का विशेष महत्व रहा है। भारत वेदों की भूमि है। इसकी प्राकृतिक सुंदरता, पवित्र नदियां और आध्यात्मिक परंपराएं इसे स्वर्ग के समान बनाती हैं। यहां की संस्कृति में यह भाव रहा है कि देश की धरती पवित्र है और उसके कण-कण में भगवान का वास है।
मौर्य ने कहा कि इसी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक भाव के कारण कभी भारत को विश्व गुरु के रूप में सम्मान प्राप्त था। उसी गौरवशाली विरासत और विचारधारा को आगे बढ़ाते हुए देश को विकसित भारत और उत्तर प्रदेश को विकसित उत्तर प्रदेश बनाने का संकल्प लिया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि यदि इस संकल्प को वेदों की भाषा और भारत की प्राचीन गौरवशाली परंपरा में व्यक्त किया जाए, तो इसका लक्ष्य फिर से “विश्व गुरु भारत” बनना है।
उपमुख्यमंत्री ने महर्षि सांदीपनि राष्ट्रीय वेद विद्या प्रतिष्ठान, उज्जैन एवं श्री मां विंध्यवासिनी श्रवण वेद पाठशाला समिति के तत्वावधान में आयोजित त्रिदिवसीय क्षेत्रीय वैदिक सम्मेलन के लिए सभी का स्वागत एवं अभिनंदन किया। उन्होंने कहा कि केंद्र अथवा प्रदेश सरकार से संबंधित जो भी आवश्यक कार्य उनके स्तर से संभव होगा, उसे पूरा कराने का प्रयास करेंगे और ऐसा करना अपने लिए सौभाग्य की बात समझेंगे।
कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रोफेसर विरुपाक्ष वी. जद्दीपाल ने की। उन्होंने देश के विभिन्न स्थानों पर संचालित वेद विद्यालयों के विकास एवं विस्तार के लिए किए जा रहे कार्यों का उल्लेख किया।
इस दौरान पूर्व सचिव प्रोफेसर किशोर मिश्रा, संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय वाराणसी के पूर्व कुलपति प्रोफेसर राजाराम शुक्ल, नगर विधायक पंडित रत्नाकर मिश्र, विधान परिषद सदस्य विनीत सिंह, भाजपा जिलाध्यक्ष लाल बहादुर सरोज, पिछड़ा वर्ग आयोग के उपाध्यक्ष सोहनलाल श्रीमाली, नगर पालिका अध्यक्ष श्याम सुंदर केसरी सहित अन्य अतिथियों का स्वागत एवं अभिनंदन किया गया।
कार्यक्रम के सफल आयोजन में पुलस्त्य द्विवेदी, कौशिक द्विवेदी, शिवराम शर्मा, संजय श्रीवास्तव, अश्वनी पांडेय, राकेश वर्मा, रामधनी पाल, कृष्ण कुमार अग्रहरि, शिवाबली राजपूत, सोमेश्वरपति त्रिपाठी, रामलाल साहनी, जय चौरसिया, प्रशांत सहित अनेक लोगों ने सहयोग किया।
वैदिक संदेश यात्रा के माध्यम से विंध्याचल की धरती से वैदिक संस्कृति, परंपरा और ज्ञान के संरक्षण का संदेश जन-जन तक पहुंचाया गया।







