ललही छठ, संतान के लम्बी उम्र की कामना माताओ ने रखा व्रत ,

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गोपीगंज नगर व ग्रामीण क्षेत्रों मे लोक पर्व ललही छठ आस्था और विश्वास के साथ मनाया गया,बुधवार को पर्व पर माताओ ने संतान की दिर्घायु जीवन की कामना के लिए व्रत रखकर विधि विधान पूर्वक पूजन कियाl

गोपीगंज नगर मे हनुमानगढ़ी,बाबा बड़े शिवधाम ,सोनिया तालाब समेत अन्य शिव मंदिर परिसर जुटी आस्था वान व्रती महिलाओं ने पुत्र की लम्बी आयु की कामना को लेकर ललही छठ का विधि विधान पूर्वक पूजा पाठ की।

मान्यता है कि भाद्रपद के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को हल षष्ठी का व्रत रखा जाता है। हल षष्ठी को हलछठ या ललही छठ के रूप में भी मनाया जाता है। हिंदू धर्म की मान्यता के अनुसार, हल षष्ठी का व्रत महिलाएं अपने संतान की लंबी उम्र के लिए रखती हैं,

पौराणिक मान्यता है कि इस दिन श्रीकृष्ण के बड़े भाई बलराम का जन्म हुआ था,मान्यता यह भी है कि इस व्रत को विधि-विधान से करने पर संतान के जुड़ी समस्याएं दूर हो जाया करती है।

ललही व्रत के दिन महिलाएं पवित्र मिट्टी की बेदी बनाकर उसमें गूलर,पलाश और कुश को रखती हैं इसके बाद विधि-विधान से पूजा की जाती है. इस क्रम में बिन जुते हुए अनाज या खाद्य पदार्थ अर्पित करती हैं।

इस व्रत में विशेष रूप से महुआ,भैंस का दूध,फंसही का चावल और उनसे बनी चीजों का इस्तेमाल किया जाता है। महिलाएं इन्हीं सामाग्री के माध्यम से व्रत पारण करती हैं।

ललही छठ व्रत के दौरान किसी भी प्रकार का अन्न ग्रहण नहीं किया जाता है। ऐसे में इस पावन व्रत में तलाब में पैदा होने वाले खाद्य पदार्थ या बिना जोते गए पैदा होने वाली चीजों का प्रयोग किया जाता है।

ललही छठ व्रत में विशेष रूप से भैंस के दूध और उससे बनी चीजों का ही इस्तेमाल किया जाता है। हनुमान गढ़ी मंदिर पर दूसरे दिन भी ललही छठ पूजा के दौरान मेले का भी आयोजन किया गयाl

इस दौरान पुलिस प्रशासन की व्यवस्था भी रही। नगर पालिका की तरफ से साफ सफाई की विशेष व्यवस्था की गयी थी। व्यवस्था की देखरेख में मंदिर के व्यवस्थापक लगे रहे।

 

रिपोर्ट – जलील अहमद

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