वाराणसी काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) परिसर शनिवार सुबह अचानक धुएं और लपटों से दहक उठा। सुबह करीब 8:20 बजे सर सुंदरलाल अस्पताल स्थित सीसीआई लैब के स्टोर से धुएं का गुबार उठता देख कर्मचारियों के होश उड़ गए। अफरा-तफरी के बीच तुरंत फायर ब्रिगेड को सूचना दी गई। बारिश से भरे जलभराव ने दमकल की राह रोकी, लेकिन फायर फाइटर्स ने हार नहीं मानी। आसपास की इमारतों से पानी की बौछार कर करीब एक घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर पूरी तरह काबू पा लिया गया।
चीफ फायर ऑफिसर का बयान
चीफ फायर ऑफिसर आनंद सिंह राजपूत ने बताया कि जिस स्टोर में आग लगी, वह अस्थायी तौर पर सामान रखने के लिए इस्तेमाल होता था। यहां बड़ी मात्रा में सिरिंज से जुड़े गत्ते रखे गए थे, जिनमें आग लगते ही लपटें तेजी से फैल गईं। उन्होंने कहा—
> “समय रहते आग पर काबू पा लिया गया, वरना स्थिति और गंभीर हो सकती थी।”
धुएं से बिगड़ा माहौल
आग भड़कने से पूरे परिसर में धुएं का जहर फैल गया। मरीजों और कर्मचारियों को सांस लेने में दिक्कत हुई। दमकल कर्मियों ने न सिर्फ आग बुझाई बल्कि धुएं को बाहर निकालने के लिए भी लगातार प्रयास किया।
सोशल मीडिया पर भ्रम
शुरुआत में आग की सूचना ‘पैट्रियोटिक विभाग’ के नाम से सोशल बीएचयू में आग से मचा हड़कंप: सर सुंदरलाल अस्पताल की सीसीआई लैब के स्टोर में उठी लपटें, एक घंटे की मशक्कत के बाद काबू
प्रशासन हुआ सतर्क
घटना के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने आपातकालीन सेवाओं की समीक्षा कर सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने का निर्णय लिया। अधिकारियों ने माना कि इस हादसे ने आपातकालीन तैयारियों की अहमियत को उजागर कर दिया है।
यह हादसा एक बार फिर चेतावनी है कि अस्पताल और विश्वविद्यालय जैसी भीड़भाड़ वाली जगहों पर सुरक्षा से जरा-सी चूक बड़ी त्रासदी में बदल सकती है।







