सूत्रों के मुताबिक, योगी सरकार की नई रणनीति का फोकस विकास, कानून-व्यवस्था और सामाजिक समीकरणों के जरिए विपक्ष के मजबूत जनाधार में सेंध लगाने पर है। भाजपा संगठन भी पूरी ताकत के साथ मैदान में उतर चुका है और बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने की कवायद तेज कर दी गई है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि योगी आदित्यनाथ का यह दांव केवल चुनावी रणनीति नहीं, बल्कि विपक्ष को रक्षात्मक मुद्रा में धकेलने की बड़ी योजना का हिस्सा है। भाजपा नेताओं का दावा है कि सरकार की योजनाओं और फैसलों का सकारात्मक असर जनता के बीच साफ दिखाई दे रहा है, जिससे विपक्ष की बेचैनी बढ़ी है।
दूसरी ओर, समाजवादी पार्टी इस पूरे अभियान को राजनीतिक प्रचार बताकर खारिज कर रही है। हालांकि राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि भाजपा की बढ़ती सक्रियता ने विपक्षी दलों की चिंता जरूर बढ़ा दी है। यही वजह है कि सपा भी अपनी जवाबी रणनीति को अंतिम रूप देने में जुटी हुई है।
आने वाले चुनावी मुकाबलों को देखते हुए उत्तर प्रदेश की राजनीति अब और ज्यादा दिलचस्प होती नजर आ रही है। योगी आदित्यनाथ के इस नए सियासी दांव ने साफ संकेत दे दिया है कि भाजपा किसी भी मोर्चे पर पीछे हटने के मूड में नहीं है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि योगी का यह कथित “ब्रह्मास्त्र” सियासी रणभूमि में कितना असर दिखाता है और विपक्ष इसका जवाब कैसे देता है।











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